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Almora News: वीपीकेएएस में विकसित तकनीकों से पर्वतीय खेती को मिल रही नई दिशा
Tue, 28 Jul 2026 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:37 PM IST
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अल्मोड़ा। जड़ी-बूटी सलाहकार समिति उत्तराखंड के उपाध्यक्ष दायत्विधारी भुवन विक्रम डबराल ने विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), हवालबाग का भ्रमण कर संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने दलहन, तिलहन एवं मक्का की उन्नत प्रजातियों, मधुमक्खी पालन, परागण अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, दीर्घकालीन पोषक तत्व प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का अवलोकन किया और किसानों को मिलने वाले लाभों पर चर्चा की।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने बताया कि पांच वर्षों में संस्थान ने पर्वतीय कृषि के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। डबराल ने कहा कि यहां विकसित तकनीक और उन्नत बीज किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर आय दिलाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन कृषि मशीनों की सराहना की, जो पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं के श्रम को कम कर खेती को अधिक सुगम बना रही हैं। भारतीय किसान संघ, उत्तराखंड के महामंत्री कुंवर पाल सिंह ने संस्थान से अधिकाधिक किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने का आग्रह किया।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने बताया कि दलहन एवं तिलहन परियोजनाओं के तहत अब तक 40 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की जा चुकी हैं तथा 120 दिनों में तैयार होने वाली अरहर की नई प्रजाति पर कार्य जारी है। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश खुल्बे ने बताया कि पांच वर्षों में मक्का की छह से अधिक जैव-संवर्धित प्रजातियां विकसित की गई हैं जिनमें दोगुनी गुणवत्ता वाला प्रोटीन तथा 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता है।
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उन्होंने दलहन, तिलहन एवं मक्का की उन्नत प्रजातियों, मधुमक्खी पालन, परागण अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, दीर्घकालीन पोषक तत्व प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का अवलोकन किया और किसानों को मिलने वाले लाभों पर चर्चा की।
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संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने बताया कि पांच वर्षों में संस्थान ने पर्वतीय कृषि के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। डबराल ने कहा कि यहां विकसित तकनीक और उन्नत बीज किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर आय दिलाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन कृषि मशीनों की सराहना की, जो पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं के श्रम को कम कर खेती को अधिक सुगम बना रही हैं। भारतीय किसान संघ, उत्तराखंड के महामंत्री कुंवर पाल सिंह ने संस्थान से अधिकाधिक किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने का आग्रह किया।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने बताया कि दलहन एवं तिलहन परियोजनाओं के तहत अब तक 40 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की जा चुकी हैं तथा 120 दिनों में तैयार होने वाली अरहर की नई प्रजाति पर कार्य जारी है। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश खुल्बे ने बताया कि पांच वर्षों में मक्का की छह से अधिक जैव-संवर्धित प्रजातियां विकसित की गई हैं जिनमें दोगुनी गुणवत्ता वाला प्रोटीन तथा 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता है।