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ईको सेंसिटिव जोन को लेकर बिनसर गेट पर धरना

Sat, 25 Nov 2017 10:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Sat, 25 Nov 2017 10:13 PM IST
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Take Eko Sensitive Zone on Binsar Gate
बिनसर गेट पर धरना देते लोग। - फोटो : Amar ujala

 बिनसर वन्य जीव विहार के सीमावर्ती क्षेत्र को इको सेंसटिव जाने बनाए जाने के विरोध में ग्रामीणों समेत विभिन्न संगठनों ने शनिवार को तय कार्यक्रम के अनुसार बिनसर गेट में प्रदर्शन किया। उन्होंनेे वन विभाग द्वारा ईको सेंसिटिव जोन पर ग्रामीणों से सहमति लिए जाने की झूठी खबर फैलाने पर नाराजगी जताते हुए विभाग से स्पष्टीकरण की मांग की। उन्होंने गैर कानूनी रूप से बिनसर के बढ़ाए क्षेत्रफल को हटाने और सेंचुरी प्रक्रिया से बाहर किए जाने और बिनसर जंगल की सुरक्षा के लिए इस अभयारण्य को समाप्त कर जंगल के प्रबंधन में जनता की भागीदारी कराए जाने की प्रकिया शुरू करने की भी मांग की। बाद में उन्होंने प्रमुख वन संरक्षक को ज्ञापन भी भेजा।

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 ग्राम प्रधान संगठन ताकुला, वन पंचायत सरपंच संगठन, मल्ला स्यूनरा विकास मंच तथा उत्तराखंड संसाधन पंचायत के नेतृत्व में बिनसर गेट में रेंज कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए वक्ताओं ने बिनसर वन्य जीव विहार को ईको सेंसिटिव जोन बनाए जाने के खिलाफ नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव द्वारा इको सेंसिटिव जोन के संदर्भ में ग्रामीणों के साथ कोई बातचीत नहीं की गई और इस संबंध में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने वन विभाग से सहमति लेने वाले नामों का खुलासा करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि बिनसर विहार की भौगोलिक स्थिति अन्य वन्य जीव विहारों से बिल्कुल भिन्न है। इस अभयारण्य के भीतर कई गांव, स्टेट, वन विभाग एवं कुमाऊं मंडल विकास निगम के विश्रामगृह स्थित हैं। उन्होंने कहा कि अभयारण्य की स्थापना के बाद पिछले 29 सालों में प्रभावित गांवों में विकास एवं रोजगार का संकट तेजी से बड़ा है और पलायन गंभीर रूप ले चुका है।
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 उन्होंने कहा कि अभयारण्य के निकटवर्ती क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन बनाए से ग्रामीणों की परेशानियां और ज्यादा होंगी। वक्ताओं ने अभयारण्य को समाप्त कर जंगल के प्रबंधन में जनता की भागीदारी कराए जाने की प्रक्रिया शुरू करने, पिछले तीन सालों में तेंदुए द्वारा काश्तकारों के मारे गए पशुओं का मुआवजा देने, ब्लॉक स्तर पर बंदर बाड़ों का निर्माण और बंदरों की नसबंदी करने, सुअरों को मारने के लिए प्रशिक्षित शिकारी नियुक्त करने आदि की मांग की। उन्होंने जबरन इको सेंसिटिव जोन बनाए जाने और उक्त समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी। धरना प्रदर्शन में रघुवर जोशी, सुनील बाराकोटी, सरपंच संगठन के अध्यक्ष डूंगर सिंह, मल्ला स्यूनरा विकास मंच के अध्यक्ष चंदन सिंह, बालम सिंह भाकुनी, बिशन बाराकोटी, राधा देवी, रेखा नगरकोटी, मीना बिष्ट, मुकेश जोशी, अशोक भोज, हयात सिंह, लक्ष्मण सिंह, पीसी तिवारी, दिनेश पांडे समेत काफी संख्या में लोग मौजूद थे।

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