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खूबसूरत और प्राचीन होने के बावजूद पर्यटन में आगे नहीं बढ़ा अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Wed, 27 Sep 2017 01:19 AM IST
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सूर्य मंदिर कोसी कटारमल
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। कोसी और सुयाल नदी के मध्य स्थित अल्मोड़ा कुमाऊं का सबसे प्राचीन नगर है। इस ऐतिहासिक नगर को चंद शासक बालो कल्याण चंद ने 1560 में बसाया। चंद शासकों की पहली राजधानी चंपावत थी। कल्याण चंद ने चंपावत से बदलकर अल्मोड़ा को अपनी राजधानी बनाया। प्राचीन काल से ही अल्मोड़ा का धार्मिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है।
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प्राचीन काल में अल्मोड़ा में तीन किले थे। पूर्वी छोर पर खगमरा नामक किले का अवशेष है। कत्यूरी राजाओं ने इसे नवीं शताब्दी में बनाया था। यहां अब खगमरा मंदिर है। दूसरा किला अल्मोड़ा नगर के मध्य में स्थित है। इसका नाम मल्ला महल था। इसे चंद शासकों ने निर्मित कराया। वर्तमान में यहां कलक्ट्रेट के कार्यालय हैं। तीसरा किला कैंट में स्थित है। इसे लालकिला मंडी के रूप में जाना जाता था।
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करीब 5200 फुट की ऊंचाई पर स्थित अल्मोड़ा नगर 12 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां से नंदाकोट, नंदादेवी, त्रिशूल आदि हिमालय की चोटियों का दृश्य दिखाई पड़ता है। अल्मोड़ा में करीब एक किमी लंबा बाजार है। जिसमें पत्थर के पटाल बिछे हुए हैं। अल्मोड़ा को कुमाऊं की सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी जाना जाता है। अल्मोड़ा अनेक स्वतंत्रता सेनानियों, लेखकों, कवियों, कलाकारों और कई क्षेत्रों में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचे विभूतियों की जन्म स्थली रही है। ऐतिहासिक अल्मोड़ा जेल में आजादी आंदोलन के दौरान पं. जवाहर लाल नेहरू समेत कई हस्तियां रहीं, वहीं स्वामी विवेकानंद सहित कई संत अल्मोड़ा आए। नृत्य सम्राट उदयशंकर को अल्मोड़ा बहुत पसंद था, उन्होंने अपनी नृत्यशाला यहीं बनाई थी। कवि रवींद्र नाथ टैगोर ने भी अल्मोड़ा कई दिन निवास किया। अल्मोड़ा की बाल मिठाई, तांबे के बर्तन, शो पीस आदि प्रसिद्ध हैं। खूबसूरत होने के बावजूद पर्यटन की दृष्टि से अल्मोड़ा बहुत आगे नहीं बढ़ सका है। नैनीताल, रानीखेत, कौसानी आदि पर्यटन स्थलों के मुकाबले यहां पर्यटक कम संख्या में आते हैं।
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अल्मोड़ा के प्रमुख दर्शनीय पर्यटन स्थल-
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नंदादेवी मंदिर: चंदवंशीय राजाओं की कुलदेवी नंदादेवी का यह प्राचीन मंदिर नगर के मध्य में स्थित है। नंदाष्टमी भाद्रपद पर यहां हर साल भव्य मेला लगता है। इसके अलावा अल्मोड़ा नगर में मुरली मनोहर, बद्रीनाथ, हनुमान मंदिर, रघुनाथ मंदिर, भैरव मंदिर, डोलीडाना, जाखनदेवी, रत्नेश्वर, उल्का देवी, त्रिपुरासुंदरी, साई मंदिर प्रसिद्ध हैं।
कसारदेवी: अल्मोड़ा से प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कसारदेवी करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां कसारदेवी मंदिर स्थित है। पूरे क्षेत्र से हिमालय की चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। वर्ष भर यहां देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। यह स्थान पिकनिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है।
चितई का ग्वल देवता मंदिर : चितई में लोगों की आस्था का केंद्र प्रसिद्ध गोलू देवता का मंदिर है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से आठ किमी की दूरी पर है। उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश से श्रद्धालु यहां मनौती मांगने पहुंचते हैं। भक्तजन मंदिर में मनौती के लिए स्टांप पेपर और साधारण कागज पर अर्जियां लिखकर मंदिर में टांगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर लोग मंदिर में घंटियां चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं।
कटारमल: अल्मोड़ा से 17 किमी दूर अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग में स्थित कटारमल में नवीं सदी में बना प्राचीन सूर्य मंदिर और मंदिर समूह स्थित है, जो यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में एक है। कुमाऊं में यह एकमात्र सूर्य मंदिर है। यह मंदिर देश के प्रमुख सूर्य मंदिरों में से माना जाता है लेकिन प्रचार-प्रसार नहीं होने और आज तक मुख्य मार्ग से मंदिर तक करीब चार किमी पक्की सड़क का निर्माण नहीं होने के कारण यहां गिने चुने पय़ॱरटक ही पहुंच पाते हैं।
बिंसर: अल्मोड़ा से 30 किमी की दूरी पर 2412 मीटर ऊंचाई पर स्थित बिंसर घने जंगलों के बीच स्थित है। बिंसर अभ्यारण्य के भ्रमण का अलग ही आनंद है। यहां से हिमालय का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
जागेश्वर: अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग में 35 किमी दूर आरतोला कस्बे से तीन किमी आगे जागेश्वर धाम स्थित है। जागेश्वर धाम में 124 मंदिरों का समूह है। यहां ज्यर्तिलिंग भी स्थापित है। देवदार के वृक्षों से घिरे जागेश्वर धाम में शिवरात्रि तथा सावन के महीने में मेला लगता है। जागेश्वर धाम के समीप स्थित वृद्ध जागेश्वर तथा झांकरसैम मंदिर भी दर्शनीय स्थल हैं।
शीतलाखेत: नगर से करीब 30 दूर शीतलाखेत रमणीय स्थल है। यहां शीतलादेवी का प्राचीन मंदिर है। यहां से भी हिमालय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
दूनागिरी: अल्मोड़ा से 80 किमी दूर स्थित दूनागिरी मंदिर भी प्रमुख दर्शनीय स्थल है। द्वाराहाट के निकट स्थित इस स्थल पर वैष्णवी शक्ति पीठ स्थित है। यहां भी साल भर में काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।