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मंदिर समिति ने अपने सिर मोल लिया पाप
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, भिकियासैंण (अल्मोड़ा)।
Updated Sat, 28 Mar 2015 11:24 PM IST
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ग्रामीणों ने देघाट चैत्राष्टमी मेले में बलि के लाए भैंसों को मंदिर समिति को सौंपकर पुण्य का काम किया। मगर मंदिर समिति ने आठ भैंसों को 1.25 लाख रुपए में पशु व्यापारी को बेचकर न केवल श्रद्धालुओं की भावना से खिलवाड़ किया बल्कि अपने सिर पाप भी ले लिया। मंदिर समिति के इस कदम से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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देघाट चैत्राष्टमी मेले में शुक्रवार को परिक्रमा के बाद मंदिर समिति को सौंपे गए भैंसों को बाहरी पशु व्यवसायियों को बेचे जाने से नाराज ग्रामीणों ने ट्रक में लादे गए भैंसों को उतार दिया। इस दौरान मंदिर समिति पदाधिकारियों और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक भी हुई।
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शुक्रवार को मंदिर में पशु बलि के लिए लाए गए दस भैंसों को मंदिर की परिक्रमा के बाद ग्रामीण मंदिर समिति को सौंप गए थे। मंदिर समिति ने इन भैंसों को किसानों को पालने के लिए देने की बात कही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि दो भैंसे तो किसानों को दे दिए गए लेकिन आठ भैंसों को मंदिर समिति ने रामनगर के पशु व्यवसायी से 1.25 लाख रुपए में बेच दिया। शनिवार को दोपहर में जैसे ही भैंसों को ट्रक में लादा जा रहा था लोग भड़क गए और उन्होंने ट्रक में लादे गए भैंसों को बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों ने मंदिर समिति के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। मंदिर समिति पदाधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
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नारेबाजी करने वालों में भुवन चंद्र, जगदीश, भूपाल सिंह, पूरन पालीवाल, आनंद सिंह, हीरा सिंह, शंकर, भवानी दत्त, बाला दत्त, नारायण दत्त आदि शामिल थे। समाचार लिखे जाने तक भैसों को देघाट में ही रखा गया था। घटना के कुछ दूर राजस्व चौकी होने के बाद भी कोई भी राजस्व कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।