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दक्षिण अमेरिका से पहुंचे पिन वर्म ने उड़ाई वैज्ञानिकों की नींद

Fri, 06 Jul 2018 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Fri, 06 Jul 2018 11:15 PM IST
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Pin Worm Released From South America Scientists Sleep
टमाटर में लगने वाला खतरनाक कीड़ा पिनवर्म। - फोटो : अमर उजाला

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अल्मोड़ा। पिछले दिनों दक्षिण अफ्रीका से पहुंचे एक खतरनाक कीड़े ने उत्तराखंड में भी दस्तक देकर कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की नींद उड़ा दी। आमतौर पर टमाटर की फसल में लगने वाला यह कीड़ा सबसे पहले अल्मोड़ा के जागेश्वर में भगरतोला में और नैनीताल के नथुवाखान में पहचाना गया। कीड़े ने टमाटर की फसल बरबाद करनी शुरू कर दी थी। लेकिन इससे पहले वह फसल को पूरी तरह बरबाद कर पाता और अन्य जगह फैल पाता कृषि विभाग और वीपीकेएस के वैज्ञानिकों ने इस कीड़े पर कंट्रोल पा लिया। यह अभियान पूरी तरह गुप्त रखा गया।  

 दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरा गांव मेरा गौरव अभियान को सफल बनाने के लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिक जागेश्वर के भगरतोला में किसानों को वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देने पहुंचे थे। वहां कृषि विभाग द्वारा तैयार पॉलीहाउस में जब वैज्ञानिकों की टीम पहुंची तो उन्हें धान के रंग और आकार का एक कीड़ा टमाटर को नुकसान पहुंचाता हुआ दिखा। वैज्ञानिकों ने परीक्षण किया तो पता चला कि यह टमाटर की फसल पर लगने वाला पिनवर्म (एक प्रकार का कीड़ा) है जो बेहद खतरनाक होता है। वैज्ञानिकों ने खतरा भांपते हुए तुरंत कृषि विभाग को जानकारी दी और कीड़े को समाप्त करने की कार्रवाई पर काम शुरू कर दिया। किसानों में भय पैदा ना हो पूरी तैयारी के बाद वीपीकेएस के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की टीम ने गुप्त अभियान चलाते हुए भगरतोला में करीब 250 पॉलीहाउस में लगातार दवा का छिड़काव किया। करीब 15 दिन के भीतर पिन वर्म पर कंट्रोल पा लिया गया। वीपीकेएस के वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर समय रहते पता नहीं चलता तो यह कीड़ा तेजी से जिले में फैल जाता। बताया जा रहा है कि इस कीड़े को नष्ट करने के लिए दुनिया में सिर्फ एक ही दवा अभी तक बनी है।  
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दक्षिण अमेरिका से 2015 में भारत पहुंचा कीड़ा  
अल्मोड़ा। टमाटर की फसल पर लगने वाला पिनवर्म 2015 में दक्षिण अमेरिका से भारत पहुंचा। सबसे पहले इसने महाराष्ट्र में दस्तक दी। उसके बाद पिछले वर्ष यह यूपी में पहुंचा। इसी साल मई माह में यह कीड़ा उत्तराखंड के नैनीताल और अल्मोड़ा में भी पहुंच गया। यह कीड़ा फसल की हरियाली को ही समाप्त कर देता है। टमाटर के अंदर पिन के रूप में घुसकर यह उसे पूरी तरह खराब कर देता है। जब यह बाहर निकलता है तो उस जगह पर डार्क सर्किल बन जाता है।  
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- वैज्ञानिक नाम: टूटा एबस्योलूटा।  
- दवा:- कोरोजन (क्लोराम ट्रिनीला पाल)।  
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कोट-  
टमाटर की फसल पर लगने वाला सबसे खतरनाक कीड़ा है। 2015 में भारत पहुंचा था। इस कीड़े को कंट्रोल में लाने के लिए भी दुनिया में सिर्फ एक ही दवा है। कृषि विभाग और वीपीकेएस ने मिलकर इस काम को गुप्त रूप से पूरा किया। -अरुणव पटनायक, निदेशक, वीपीकेएस संस्थान, अल्मोड़ा  

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कोट- 
यह अभियान पूरी तरह गुप्त था। वीपीकेएस के वैज्ञानिकों से जानकारी मिलने के बाद संयुक्त रूप से प्रभावित जगह पर लगातार दवा का छिड़काव किया गया। करीब 15 दिन के भीतर इस कीड़े पर नियंत्रण पा लिया गया है। और किसानों की फसल को बरबाद होने से बचा लिया गया। -प्रियंका सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, अल्मोड़ा 
 
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