{"_id":"689cd9c1b9edc4bb7f0cda5e","slug":"people-face-the-problems-almora-news-c-232-1-alm1002-132282-2025-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: चार वर्षों में एक भी स्थायी प्राध्यापक की नहीं हो सकी है तैनाती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: चार वर्षों में एक भी स्थायी प्राध्यापक की नहीं हो सकी है तैनाती
Thu, 14 Aug 2025 12:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:00 AM IST
विज्ञापन
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय एक ओर अपना पांचवां स्थापना दिवस बना रहा है, वहीं दूसरी ओर विवि प्राध्यापकों की कमी से जूझ रहा है।
हैरानी की बात है कि विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के चार वर्षों बाद विवि के अधीन किसी भी परिसर में एक भी स्थायी प्राध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में 18 हजार छात्र- छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा अतिथि शिक्षकों के भरोसे है।
एसएसजे विश्वविद्यालय में यूजीसी के मानकों के मुताबिक हर विभाग में एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर और चार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होनी अनिवार्य है। इस हिसाब से चारों परिसरों में 569 स्थायी प्राध्यापक होने चाहिए।
लेकिन वर्तमान में विवि के अधीन अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत परिसर में महज 85 स्थायी प्राध्यापक ही तैनात हैं। चार सालों में इन परिसरों में एक भी स्थाई प्राध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
हालात ये कि इन परिसरों में पढ़ रहे 18 हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अतिथि शिक्षकों के कंधों पर है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यूजीसी के मानकों के मुताबिक चारों परिसरों के लिए 569 प्राध्यापकों की तैनाती का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को भेजा है लेकिन प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में परिसरों में लगातार छात्र संख्या घट रही है।
विज्ञापन
हैरानी की बात है कि विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के चार वर्षों बाद विवि के अधीन किसी भी परिसर में एक भी स्थायी प्राध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में 18 हजार छात्र- छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा अतिथि शिक्षकों के भरोसे है।
एसएसजे विश्वविद्यालय में यूजीसी के मानकों के मुताबिक हर विभाग में एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर और चार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होनी अनिवार्य है। इस हिसाब से चारों परिसरों में 569 स्थायी प्राध्यापक होने चाहिए।
विज्ञापन
लेकिन वर्तमान में विवि के अधीन अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत परिसर में महज 85 स्थायी प्राध्यापक ही तैनात हैं। चार सालों में इन परिसरों में एक भी स्थाई प्राध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
हालात ये कि इन परिसरों में पढ़ रहे 18 हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अतिथि शिक्षकों के कंधों पर है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यूजीसी के मानकों के मुताबिक चारों परिसरों के लिए 569 प्राध्यापकों की तैनाती का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को भेजा है लेकिन प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में परिसरों में लगातार छात्र संख्या घट रही है।