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Almora News: संविदा कर्मियों पर जिला पुस्तकालय की जिम्मेदारी, पुरानी पुस्तकों से पढ़ने की मजबूरी
Sat, 30 Sep 2023 11:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 30 Sep 2023 11:59 PM IST
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में जिला पुस्तकालय में व्यवस्थाएं बदहाल है। यहां स्वीकृत केटोलागर, कनिष्ठ सहायक की भी तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में दो संविदा कर्मियों पर जिम्मेदारी है। पुस्तकालय लंबे समय से पुस्तकालयाध्यक्ष के बिना संचालित हो रहा है। पुस्तकालयाध्यक्ष नहीं होने से कर्मियों को नई पुस्तकें मंगवाने समेत अन्य कार्यों के लिए शिक्षा विभाग की स्वीकृति का इंतजार रहता है।
जिले के युवाओं को लाभ देने के उद्देश्य से वर्ष 1957 में जीआईसी अल्मोड़ा के पास जिला पुस्तकालय स्थापित किया गया। कर्मचारियों के कमी के कारण युवाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 1998 में यहां तैनात प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष की पदोन्नति होने के बाद से यह पद रिक्त है। इसके साथ ही केटोलागर, कनिष्ठ सहायक के पदों पर भी संविदा कर्मी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को नई पुस्तकें मंगवाने समेत दूसरे कामों के लिए शिक्षा विभाग पर निर्भर रहना पड़ता है। हालात ये हैं कि बगैर पुस्तकालयध्यक्ष के बीते चार वर्षों में नई किताबों की खरीद तक नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने यहां पहुंचने वाले युवा पुरानी किताबों में नए भविष्य की तलाश करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
पुस्तकालय का हुआ जीर्णोंद्धार, तैनाती नहीं हुए कर्मचारी
अल्मोड़ा। एक करोड़ रुपये से पुस्तकालय का जीर्णोद्धार किया गया। इससे यह नए स्वरूप में आया है लेकिन यहां जरूरी कर्मचारियों की तैनाती के प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में यहां के हालात सुधर नहीं पा रहे हैं और नई पुस्तकों की खरीद करना चुनौती बन गया है।
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चार वर्षों से एक भी नई पुस्तक नहीं पहुंची पुस्तकालय में
अल्मोड़ा। जिला पुस्तकालय में हर रोज जिले के कई क्षेत्रों से 200 से अधिक युवा कई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं। नई किताबें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुस्तकालय कर्मियों के मुताबिक चार साल से कोई पुस्तक यहां नहीं आई है। युवा अपने घरों से प्रतियोगी पुस्तक लाकर तैयारी कर रहे हैं।
उत्तराखंड में संचालित सभी जिला पुस्तकालयों के लिए शासन स्तर पर नियमावली तैयार हो रही है। इसके बाद ही रिक्त पदों पर कर्मचारियों की तैनाती संभव है।
अंबा दत्त बलोदी, सीईओ, अल्मोड़ा।
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जिले के युवाओं को लाभ देने के उद्देश्य से वर्ष 1957 में जीआईसी अल्मोड़ा के पास जिला पुस्तकालय स्थापित किया गया। कर्मचारियों के कमी के कारण युवाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 1998 में यहां तैनात प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष की पदोन्नति होने के बाद से यह पद रिक्त है। इसके साथ ही केटोलागर, कनिष्ठ सहायक के पदों पर भी संविदा कर्मी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को नई पुस्तकें मंगवाने समेत दूसरे कामों के लिए शिक्षा विभाग पर निर्भर रहना पड़ता है। हालात ये हैं कि बगैर पुस्तकालयध्यक्ष के बीते चार वर्षों में नई किताबों की खरीद तक नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने यहां पहुंचने वाले युवा पुरानी किताबों में नए भविष्य की तलाश करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
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पुस्तकालय का हुआ जीर्णोंद्धार, तैनाती नहीं हुए कर्मचारी
अल्मोड़ा। एक करोड़ रुपये से पुस्तकालय का जीर्णोद्धार किया गया। इससे यह नए स्वरूप में आया है लेकिन यहां जरूरी कर्मचारियों की तैनाती के प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में यहां के हालात सुधर नहीं पा रहे हैं और नई पुस्तकों की खरीद करना चुनौती बन गया है।
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चार वर्षों से एक भी नई पुस्तक नहीं पहुंची पुस्तकालय में
अल्मोड़ा। जिला पुस्तकालय में हर रोज जिले के कई क्षेत्रों से 200 से अधिक युवा कई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं। नई किताबें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुस्तकालय कर्मियों के मुताबिक चार साल से कोई पुस्तक यहां नहीं आई है। युवा अपने घरों से प्रतियोगी पुस्तक लाकर तैयारी कर रहे हैं।
उत्तराखंड में संचालित सभी जिला पुस्तकालयों के लिए शासन स्तर पर नियमावली तैयार हो रही है। इसके बाद ही रिक्त पदों पर कर्मचारियों की तैनाती संभव है।
अंबा दत्त बलोदी, सीईओ, अल्मोड़ा।