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Almora News: तीन लाख लोगों के इलाज की जिम्मेदारी लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
Sun, 17 Dec 2023 11:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 17 Dec 2023 11:35 PM IST
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बागेश्वर। जिला अस्पताल बागेश्वर नाक, कान, त्वचा और मानसिक रोग का इलाज कर पाने में सक्षम नहीं हैं। जिला अस्पताल में लंबे समय से ईएनटी सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है जिससे जिले के लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं।
करीब तीन लाख आबादी की स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल पर हिमालयी क्षेत्र से सटे बागेश्वर जिले के लोगों के साथ सीमावर्ती पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले की सीमाओं में रहने वाले लोगों का दबाव रहता है। गढ़वाल के चमोली जिले से सटे ग्वालदम, थराली, नारायणबगड़ आदि इलाकों की भी निर्भरता है। इन जिलों के सीमांत क्षेत्र में रहने वाले लोग बागेश्वर जिला अस्पताल की सेवाएं लेते हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में जिले के मरीजों को अल्मोड़ा और हल्द्वानी जाना पड़ता है। इसमें धन और समय की बर्बादी हो रही है। पिथौरागढ़ जिले की सीमा पर बसे रमाड़ी के सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह कार्की ने कहा कि लोग नाक, कान, चर्म रोग के इलाज के लिए जिला मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ता है। कपकोट के सामाजिक कार्यकर्ता महिमन सिंह कपकोटी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्वीकृत पदों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए ताकि लोगों का इलाज हो सके।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से लगातार स्वास्थ्य महानिदेशालय को अवगत कराया जाता है। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होते ही जिले में भी तैनाती होगी।
डीपी जोशी, सीएमओ बागेश्वर।
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करीब तीन लाख आबादी की स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल पर हिमालयी क्षेत्र से सटे बागेश्वर जिले के लोगों के साथ सीमावर्ती पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले की सीमाओं में रहने वाले लोगों का दबाव रहता है। गढ़वाल के चमोली जिले से सटे ग्वालदम, थराली, नारायणबगड़ आदि इलाकों की भी निर्भरता है। इन जिलों के सीमांत क्षेत्र में रहने वाले लोग बागेश्वर जिला अस्पताल की सेवाएं लेते हैं।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में जिले के मरीजों को अल्मोड़ा और हल्द्वानी जाना पड़ता है। इसमें धन और समय की बर्बादी हो रही है। पिथौरागढ़ जिले की सीमा पर बसे रमाड़ी के सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह कार्की ने कहा कि लोग नाक, कान, चर्म रोग के इलाज के लिए जिला मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ता है। कपकोट के सामाजिक कार्यकर्ता महिमन सिंह कपकोटी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्वीकृत पदों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए ताकि लोगों का इलाज हो सके।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से लगातार स्वास्थ्य महानिदेशालय को अवगत कराया जाता है। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होते ही जिले में भी तैनाती होगी।
डीपी जोशी, सीएमओ बागेश्वर।