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धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो सका पांडवखोली

Sun, 16 Dec 2018 11:33 PM IST
Almora desk अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)। Published by: Almora desk Updated Sun, 16 Dec 2018 11:33 PM IST
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Pandavkholi did not develop in the form of religious tourism
पांडवखोली से इस तरह दिखता है प्रकृति का नजारा। - फोटो : अमर उजाला
 महाभारत कालीन घटनाओं से जुड़े समुद्रतल से 8800 फुट की ऊंचाई पर स्थित स्वर्गपुरी पांडवखोली में धार्मिक और अध्यात्मिक पर्यटन की विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की नजरें इस दिव्य स्थल से आज भी कोसों दूर हैं। यहां साल भर देसी-विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। लोग इस एकांत स्थल पर नियमित रूप से योग और ध्यान करने पहुंचते हैं। मांग के बावजूद इसे आज तक धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित नहीं किया गया है।
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पर्यटन नगरी से 60 किमी की दूरी पर स्थित स्वर्गपुरी पांडवखोली के लिए द्वाराहाट से कुकूछीना जाना पड़ता है। कुकूछीना से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडवखोली जैसे दिव्य और एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। पांडवखोली से हिमालय, सनराइज और सनसेट के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसी के चलते यहां देसी-विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं। बताते हैं कि महाभारत काल में जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ था, तब पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ इसी स्थल पर रहे थे। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भीम आराम करते थे, इसे भीम की गुदड़ी कहा जाता है। हजारों साल बाद ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि महाराज की नजर इस स्थल पर पड़ी तो उन्होंने इसके विकास के लिए प्रयास किए। भव्य मंदिर का निर्माण कराया। अब पथ भ्रमण संघ ने लोगों के सहयोग से यहां आश्रम बना दिया है, ध्यान मठ केंद्र बन गया है। टावरनुमा मठ में ध्यान लगाया जाता है। दिसंबर में बाबा की पुण्यतिथि पर विशाल भंडारा होता है। आश्रम के मुख्य कार्यकर्ता हरीश साह का कहना है कि विदेशी सैलानियों की नजरें इस दुर्गम स्थान पर पड़ीं, लेकिन शासन-प्रशासन की नजरें इस तरफ इनायत नहीं हुई हैं। मंदिर में चहारदीवारी और कुकूछीना से रोपवे लगाने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है। यहां पांडवों की पत्थर से निर्मित मूर्तियां स्थापित की गई हैं। अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण सर्दियों में हर साल यह चोटी वर्फ से लकदक रहती है। 
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इस बार 19 को मनाई जाएगी बाबा की पुण्यतिथि 
रानीखेत। स्वर्गपुरी पांडवखोली में ब्रह्मलीन महाराज नागा बाबा बलवंत गिरि की 25वीं पुण्यतिथि इस बार 19 दिसंबर को  मनाई जाएगी। विशाल भंडारे के साथ ही स्थानीय महिलाओं और बच्चों के बीच विभिन्न खेल गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। पथ भ्रमण संघ के अध्यक्ष हरीश शाह ने सभी से समारोह को सफल बनाने की अपील की है। 
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