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महिलाओं की पीड़ा को समझने वाला कोई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Sat, 11 Nov 2017 10:20 PM IST
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द्वाराहाट में बैठक करतीं एकता परिषद की महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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महिला एकता परिषद की बैठक में जंगली जानवरों के आतंक का मुद्दा छाया रहा। महिलाओं ने कहा कि सरकारें बदलती हैं, लेकिन महिलाओं की पीड़ा को कोई नहीं समझ रहा। सुअरों, बंदरों और लावारिस जानवर खेती किसानी तबाह कर रहे हैं, लेकिन सरकार की कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। कहा कि क्षेत्र में बड़ी झाड़ियों का कटान नहीं होने के कारण वहां तेंदुए का अड्डा बना हुआ है। खेती बचाने को लेकर शीघ्र सार्थक कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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रणां में अध्यक्ष लीला देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में महिलाओं ने कहा कि एक तरफ पलायन रोकने के लिए आयोग का गठन किया गया है, लेकिन पलायन का प्रमुख कारण जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। बंदर, सुअरों ने खेती पूरी तरह से तबाह कर दी है। परिषद की सचिव मधुबाला कांडपाल ने कहा कि परिषद इस मुद्दे को लेकर कई बार आंदोलन और रैलियां निकाल चुकी है, वर्तमान में भी संघर्षरत है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को लेकर अभी तक सार्थक कदम नहीं उठाए हैं। ग्रामीण खेती को बचाने के लिए ठोस नीति नहीं बनी तो गांव के गांव वीरान हो जाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर गत दिनों सीएम त्रिवेंद्र रावत के भ्रमण के दौरान उन्हें ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। बैठक में भगवती तिवारी, खष्टी देवी, लीला देवी, रेखा देवी, कमला देवी, कलावती, गीता देवी आदि ने विचार रखे। तय हुआ कि शीघ्र ही वृहद आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
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