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चार डॉक्टर अवकाश में, मरीजों को उठानी पड़ रही दिक्कतें
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अल्मोड़ा। जिला अस्पताल में इन दिनों डॉक्टरों के अवकाश पर रहने से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में सर्जन समेत चार डॉक्टर अवकाश पर हैं। इसकी वजह से ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं। अस्पताल में ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर हल्द्वानी जाना पड़ रहा है।
कोरोना काल में नगर का बेस अस्पताल कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। इसकी वजह से जिला अस्पताल में ही मरीजों का अधिक दबाव है। उधर, जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अभाव में स्वास्थ्य सुविधाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में सर्जन 24 अगस्त से अवकाश पर हैं। निश्चेतक भी पीजी डिग्री के लिए गए हैं, जबकि अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ और पैथॉलिस्ट भी अस्वस्थता के कारण छुट्टी पर हैं। सर्जन, निश्चेतक, अस्थि रोग विशेषज्ञ समेत कुल चार डॉक्टरों के छुट्टी पर रहने से ऑपरेशन ठप हैं। हालांकि नेत्र, कान के छोटे ऑपरेशन हो रहे हैं, लेकिन अस्थि समेत सर्जिकल ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। वहीं कुछ लोग मजबूरी में महंगा होने के बावजूद निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने को मजबूर हैं। कोरोना के भय से ऑपरेशन के लिए हल्द्वानी जाने से भी मरीज और उनके तीमारदार बच रहे हैं। हालांकि पीएमएस डॉ. आरसी पंत खुद ही अधिकतर मरीजों को देख रहे हैं, पर समस्या बनी हुई है।
सरकारी अस्पतालों से गरीब जनता को कम खर्च में इलाज मिल जाता है, लेकिन डॉक्टरों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोरोना काल में पहले ही लोगों की आर्थिक स्थिति खराब है।
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-गीता शाह, थाना बाजार।
दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग अस्पताल पहुंचते हैं। ग्रामीणों को डॉक्टरों के अनुपस्थित होने की जानकारी नहीं रहती। इसके चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
-मोहन चंद्र भट्ट, जाखनदेवी।
कोरोना काल में पहले से लोग भयभीत हैं। दूरदराज से डरते हुए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने से उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं।
-पुष्पा सनवाल, शैल।
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कोरोना काल में नगर का बेस अस्पताल कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। इसकी वजह से जिला अस्पताल में ही मरीजों का अधिक दबाव है। उधर, जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अभाव में स्वास्थ्य सुविधाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में सर्जन 24 अगस्त से अवकाश पर हैं। निश्चेतक भी पीजी डिग्री के लिए गए हैं, जबकि अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ और पैथॉलिस्ट भी अस्वस्थता के कारण छुट्टी पर हैं। सर्जन, निश्चेतक, अस्थि रोग विशेषज्ञ समेत कुल चार डॉक्टरों के छुट्टी पर रहने से ऑपरेशन ठप हैं। हालांकि नेत्र, कान के छोटे ऑपरेशन हो रहे हैं, लेकिन अस्थि समेत सर्जिकल ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। वहीं कुछ लोग मजबूरी में महंगा होने के बावजूद निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने को मजबूर हैं। कोरोना के भय से ऑपरेशन के लिए हल्द्वानी जाने से भी मरीज और उनके तीमारदार बच रहे हैं। हालांकि पीएमएस डॉ. आरसी पंत खुद ही अधिकतर मरीजों को देख रहे हैं, पर समस्या बनी हुई है।
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सरकारी अस्पतालों से गरीब जनता को कम खर्च में इलाज मिल जाता है, लेकिन डॉक्टरों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोरोना काल में पहले ही लोगों की आर्थिक स्थिति खराब है।
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-गीता शाह, थाना बाजार।
दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग अस्पताल पहुंचते हैं। ग्रामीणों को डॉक्टरों के अनुपस्थित होने की जानकारी नहीं रहती। इसके चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
-मोहन चंद्र भट्ट, जाखनदेवी।
कोरोना काल में पहले से लोग भयभीत हैं। दूरदराज से डरते हुए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने से उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं।
-पुष्पा सनवाल, शैल।