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सड़क के लिए तरस रहे स्वतंत्रता सेनानियों के गांव
ब्यूरो /अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Fri, 13 Nov 2015 11:53 PM IST
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आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सालम के स्वतंत्रता सेनानियों के कई गांव आज भी उपेक्षित हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के अधिकांश गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सके हैं।
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सड़कें मंजूर होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। अधिकांश सड़कें वन अधिनियम के तहत मंजूरी नहीं मिलने के कारण रुकी पड़ी हैं। जबकि कई सड़कों का सर्वे होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
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प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्व. नर सिंह धानक, टीका सिंह कन्याल, राम सिंह धौनी, दुर्गादत्त शास्त्री, प्रताप सिंह बोरा, मर्चू राम, राम सिंह आजाद जैसे अनेक आंदोलनकारियों का स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है। आजादी के छह दशक बाद भी क्रांतिकारियों के गांवों का पर्याप्त विकास नहीं हो सका है।
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आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की बाजी लगा देने वाले अमर शहीद स्व. नर सिंह धानक के गांव चौकुना, टीका सिंह कन्याल के गांव कांडे, राम सिंह धौनी के गांव तल्ला बिनौला, दुर्गा दत्त शास्त्री के गांव नया संग्रोली, प्रताप सिंह बोरा के गांव दाड़िमी, केशर सिंह नेगी के गांव सैनोली में सड़क नहीं पहुंची है।
इन गांवों के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए चार से पांच किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। लोनिवि से मिली जानकारी के मुताबिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांवों के लिए सड़कों के निर्माण की योजनाएं स्वीकृत हैं, लेकिन सर्वेक्षण के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई और वन अधिनियम तथा अन्य कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका है।