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एनजीटी करती रहे कार्रवाई हम नहीं सुधरेंगे
ब्यूरो, अमर उजाला अल्मोड़ा।
Updated Thu, 17 Mar 2016 10:37 PM IST
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एनजीटी की कार्रवाई के बाद भी नहीं जागे
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यावरण संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कई प्राविधान किए हैं। एनजीटी द्वारा 10 दिसंबर 2015 को पारित आदेश के मुताबिक प्लास्टिक, थर्माकोल से बनी थैलियां, गिलास, पत्तल, दोने आदि के निर्माण, विक्रय और उपयोग प्रतिबंधित है। लेकिन, पालिका परिषद अल्मोड़ा को इसकी कोई परवाह नहीं है।
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पूर्व में अमर उजाला ने इस बारे में कई खबरें भी छापी, लेकिन पालिका बोर्ड के अधिकारी नहीं जागे। इसका परिणाम यह हुआ कि एनजीटी ने पालिका परिषद के ईओ पर 15 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। हालत यह है कि इसके बावजूद जहां-तहां कूड़ा जलाया जा रहा है।
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एनजीटी के नियमों के अनुसार प्लास्टिक, थर्माकोल से बनी थैलियां, गिलास, पत्तल, दोने आदि के निर्माण, विक्रय और उपयोग पर प्रतिबंध होने के साथ ही प्लास्टिक आदि कूड़ा जलाना भी दंडनीय है। इसके बावजूद बाजारों में पॉलिथीन से बनी प्रतिबंधित सामग्री खुलेआम बिक रही है। लोग भी इस सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। नगर में भी कई स्थानों पर कूड़ा जलता देखा जा सकता है। अमर उजाला समय-समय पर खबरें प्रकाशित कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करता रहा है।
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पालिका परिषद के पास शहर के कूड़े के जैविक और अजैविक श्रेणी में निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं होने से नगर से हर रोज निकलने वाला कूड़ा फलसीमा क्षेत्र में गिराया जा रहा है। इस कूड़े का निस्तारण आग लगाकर किया जाता है। कूड़े के ढेर से उठने वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
इसी को देखते हुए एक रिट के निस्तारण में एनजीटी ने पालिका के अधिशासी अधिकारी पर 15 हजार का जुर्माना लगाया है और पालिका अध्यक्ष समेत सभी निर्वाचित 11 वार्ड सदस्यों को भी नोटिस जारी किया है। 11 मार्च को अमर उजाला ने एनजीटी के नियमों के उल्लंघन को लेकर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी, लेकिन एनजीटी के नियमों के अनुपालन के लिए पालिका और जिला प्रशासन ने कोई प्रभावी पहल नहीं की। बृहस्पतिवार को भी कुछ स्थानों पर कूड़ा जलाया गया था।
पालिका परिषद द्वारा हर रोज नगर से उठने वाला टनों कूड़ा फलसीमा की पहाड़ी से नीचे गिराया जा रहा है। जलाने पर इस कूड़े से लगातार धुआं उठता रहता है। यहां से कुछ ही दूरी पर सुआल नदी और बाबा विश्वनाथ का मंदिर तथा शमशानघाट है। यही गंदगी नदी तक पहुंच रही है। कूड़ा अन्यत्र डालने की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन पालिका और प्रशासन बेखबर हैं।
- कमल वर्मा, ग्राम प्रधान सिकुड़ा।
अधिक मुनाफा कमाने की होड़ और सुविधा की चाह के चलते लोग लगातार पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी द्वारा बनाए नियमों का जनता को पालन तो करना ही चाहिए, लेकिन मात्र बोर्ड लगा देने से ही पालिका परिषद का दायित्व पूरा नहीं हो जाता। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पालिका को नियमित कार्रवाई करनी चाहिए।
- जीवन उप्रेती, रानीधारा।
पालिका परिषद पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं है। वर्षों से कूड़ा ग्रामीण क्षेत्र में फैलाकर जलाया जा रहा है। पालिका क्षेत्र के घरों का मलमूत्र नालियों से होकर नदियों तक पहुंच रहा है। एनजीटी के नियम जनहित में हैं। प्रशासन को नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए।
- रमेश बहुगुणा, चीनाखान।