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Almora News: जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति की जल्द बनेगी नियमावली
Thu, 15 Feb 2024 11:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 15 Feb 2024 11:40 PM IST
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भनोली तहसील परिसर में जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में मौजूद लोग। संवाद
- फोटो : samvad
हाईकोर्ट के आदेश पर कवायद शुरू, एसडीएम ने ली जागेश्वर धाम मंदिर प्रबंध समिति की बैठक
अल्मोड़ा। जागेश्वर धाम में जल्द ही मंदिर समिति की नियमावली (बायलॉज) बनेगी। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। एसडीएम एनएस नगन्याल की अध्यक्षता में जागेश्वर धाम हुई बैठक में पहले चरण में प्रबंधन समिति और पुजारी प्रतिनिधि ने नियमावली को लेकर कुछ सुझाव दिए।
हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 में अस्तित्व में आई जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का 10 साल बाद भी बायलॉज नहीं बन पाया था। मंदिर समिति की स्पष्ट नियमावली नहीं होने से कई बार असमंजस की स्थिति बनी रहती है। व्यवस्था को नियमानुसार लागू किया जा सके इसके लिए धर्मस्व सचिव के निर्देश पर बृहस्पतिवार को एसडीएम ने तहसील परिसर में जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति और पुजारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। प्रबंधक ज्योत्सना पंत और पुजारी प्रतिनिधि नवीन चंद्र भट्ट ने पहले चरण में कुछ सुझाव प्रस्तुत किए। उपाध्यक्ष ने सूचना देरी से मिलने का हवाला देते हुए सुझाव के लिए 15 दिन का समय मांगा। इस मौके पर तहसीलदार बरखा जलाल, पंडित शुभम भट्ट, पंडित हेमंत भट्ट, पंडित कैलाश भट्ट संगम, भगवान चंद्र भट्ट, आनंद भट्ट आदि मौजूद रहे। संवाद
प्रबंधन के मुख्य सुझाव
- पुजारियों को अप्रैल से अगस्त तक 50 और सितंबर से मार्च तक 30 प्रतिशत अंशदान दें।
- पुजारियों को मंदिर समूह में किए गए पूजन की आय का 70 प्रतिशत दिया जाना चाहिए।
- बाहरी पुजारियों के मंदिर गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने पर बारीदार पुजारी के अंशदान में कटौती हो।
- बारीदार पुजारियों के अलावा अन्य पुजारियों का मंदिर में घूमना, बैठना प्रतिबंधित होना चाहिए।
पुजारी प्रतिनिधियों के मुख्य सुझाव
- मंदिर ट्रस्ट केवल आंतरिक प्रबंधन का कार्य करेगी, बाहरी कार्यों में हस्तक्षेप नहीं होगा।
- निर्णय के लिए प्रबंधन समिति को समस्त सदस्यों की लिखित सहमति लेनी चाहिए।
- पुजारी समुदाय से संबंधित प्रकरणों पर पुजारी प्रतिनिधि की सहमति अनिवार्य।
- नए पुजारियों को आवेदन के बाद 15 दिन के भीतर हर हाल में सूचीबद्ध करना चाहिए।
कोट
जागेश्वर मंदिर समिति की नियमावली बनाई जानी है। इसके लिए बैठक बुलाई गई थी। प्रबंधन और पुजारी प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे गए हैं। बाद में आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमावली तैयारी होगी। मंदिर समिति के सदस्य, पुजारी और अन्य 15 दिन के भीतर अपने सुझाव दे सकते हैं।
विज्ञापन
-एनएस नगन्याल, एसडीएम
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अल्मोड़ा। जागेश्वर धाम में जल्द ही मंदिर समिति की नियमावली (बायलॉज) बनेगी। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। एसडीएम एनएस नगन्याल की अध्यक्षता में जागेश्वर धाम हुई बैठक में पहले चरण में प्रबंधन समिति और पुजारी प्रतिनिधि ने नियमावली को लेकर कुछ सुझाव दिए।
हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 में अस्तित्व में आई जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का 10 साल बाद भी बायलॉज नहीं बन पाया था। मंदिर समिति की स्पष्ट नियमावली नहीं होने से कई बार असमंजस की स्थिति बनी रहती है। व्यवस्था को नियमानुसार लागू किया जा सके इसके लिए धर्मस्व सचिव के निर्देश पर बृहस्पतिवार को एसडीएम ने तहसील परिसर में जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति और पुजारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। प्रबंधक ज्योत्सना पंत और पुजारी प्रतिनिधि नवीन चंद्र भट्ट ने पहले चरण में कुछ सुझाव प्रस्तुत किए। उपाध्यक्ष ने सूचना देरी से मिलने का हवाला देते हुए सुझाव के लिए 15 दिन का समय मांगा। इस मौके पर तहसीलदार बरखा जलाल, पंडित शुभम भट्ट, पंडित हेमंत भट्ट, पंडित कैलाश भट्ट संगम, भगवान चंद्र भट्ट, आनंद भट्ट आदि मौजूद रहे। संवाद
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प्रबंधन के मुख्य सुझाव
- पुजारियों को अप्रैल से अगस्त तक 50 और सितंबर से मार्च तक 30 प्रतिशत अंशदान दें।
- पुजारियों को मंदिर समूह में किए गए पूजन की आय का 70 प्रतिशत दिया जाना चाहिए।
- बाहरी पुजारियों के मंदिर गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने पर बारीदार पुजारी के अंशदान में कटौती हो।
- बारीदार पुजारियों के अलावा अन्य पुजारियों का मंदिर में घूमना, बैठना प्रतिबंधित होना चाहिए।
पुजारी प्रतिनिधियों के मुख्य सुझाव
- मंदिर ट्रस्ट केवल आंतरिक प्रबंधन का कार्य करेगी, बाहरी कार्यों में हस्तक्षेप नहीं होगा।
- निर्णय के लिए प्रबंधन समिति को समस्त सदस्यों की लिखित सहमति लेनी चाहिए।
- पुजारी समुदाय से संबंधित प्रकरणों पर पुजारी प्रतिनिधि की सहमति अनिवार्य।
- नए पुजारियों को आवेदन के बाद 15 दिन के भीतर हर हाल में सूचीबद्ध करना चाहिए।
कोट
जागेश्वर मंदिर समिति की नियमावली बनाई जानी है। इसके लिए बैठक बुलाई गई थी। प्रबंधन और पुजारी प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे गए हैं। बाद में आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमावली तैयारी होगी। मंदिर समिति के सदस्य, पुजारी और अन्य 15 दिन के भीतर अपने सुझाव दे सकते हैं।
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-एनएस नगन्याल, एसडीएम