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अगली पीढ़ी के लिए मंडरा रहा ख्ातरा

Sat, 02 May 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Sat, 02 May 2015 11:20 PM IST
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Kratra cruising to the next generation
अब तक यह माना जाता था कि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में आमतौर पर थैलेसीमिया नहीं होता, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बेस अस्पताल अल्मोड़ा में स्थित एक्शन ऑन बर्थ डिफेक्शन प्रोजेक्ट और रक्त अल्पता थैलेसीमिया स्क्रीनिंग के तहत की गई जांच में 82 बच्चों में थैलेसीमिया संवाहक अवस्था में पाया गया। ऐसे लोगों में थैलेसीमिया के लक्षण नहीं होते, लेकिन अगर यह लोग दूसरे थैलेसीमिया संवाहक से विवाह करें तो अगली पीढ़ी में यह रोग सामने आ सकता है।
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बेस अस्पताल में नवंबर-2013 से मार्च 2015 तक सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त 72 विद्यालयों के कक्षा नौ से 12वीं तक के 14 हजार 224 छात्र-छात्राओं के रक्त की जांच की गई। जांच में 1871 बच्चों में रक्त की कमी पाई गई लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से 82 बच्चों में थैलीसीमिया संवाहक अवस्था में पाया गया। इसका मतलब है कि इन बच्चों को इस पीढ़ी में थैलेसीमिया रोग नहीं होगा, लेकिन इनके रक्त में थैलेसीमिया को आनुवांशिक रूप से आगे बढ़ाने के लक्षण पाए गए हैं।

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कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा.एच जंगपांगी ने बताया थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रोग है। थैलेसीमिया संवाहक व्यक्ति अगर किसी दूसरे थैलेसीमिया संवाहक से विवाह करेगा तो उनकी संतान के 25 प्रतिशत थैलेसीमिया रोग से ग्रस्त होने की संभावना होती है। यह भी उल्लेखनीय है कि आज भी थैलेसीमिया लाइलाज है। इसमें रक्त का बनना बंद हो जाता है और रोगी को हर माह रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। रक्त चढ़ाने के बाद भी कई तरह की जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं और उसका जिंदा रहना मुश्किल हो जाता है।
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ऐसे लोग जैनेटिक काउंसलिंग के बाद ही करें शादी: डा. भट्ट
वरिष्ठ फिजीशियन डा. नीलांबर भट्ट ने बताया कि थैलेसीमिया संवाहक अवस्था में कोई लक्षण नहीं होता और न ही ऐसे व्यक्ति को किसी तरह की दिक्कत होती है लेकिन इस तरह के व्यक्ति को किसी भी दशा में थैलेसीमिया संवाहक अवस्था वाले से शादी नहीं करनी चाहिए अन्यथा अगली पीढ़ी में यह रोग उभरकर सामने आ सकता है। ऐसे लोगों को शादी से पहले जैनेटिक काउंसलिंग जरूर करनी चाहिए।

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