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खजान मास्साब को बिसरा चुकी पर्यटन नगरी
ब्यूरो /अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Thu, 26 Nov 2015 12:51 AM IST
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राष्ट्रीय खेल हॉकी में भी पर्यटन नगरी का गौरवशाली अतीत रहा है। 1970 के दशक में यहां के हॉकी खिलाड़ियों का पूरे प्रदेश में दबदबा था। यहां अखिल भारतीय स्तर तक की हॉकी प्रतियोगिताएं हुई थी।
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यह सब संभव हो सका था दिवंगत हॉकी कोच, खिलाड़ी खजान मास्साब की बदौलत, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस कोच ने युवाओं का कॅरिअर बनाने के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया, आज लोगों ने उसे ही बिसरा दिया है।
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स्व. विजय सिंह बिष्ट उर्फ खजान मास्साब का रुझान बचपन से ही हॉकी खेल के प्रति था। वह राष्ट्रीय खेल का प्रशिक्षण लेकर इसे युवाओं को भी बांटना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने 1966 से 68 तक साई प्रशिक्षण विद्यालय रामपुर से पीटीआई का डिप्लोमा लिया।
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1969 में राष्ट्रीय खेल प्रशिक्षण संस्थान (एनआईएस) पटियाला से हॉकी में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद जब वह रानीखेत पहुंचे तो वह युवाओं के बीच में रहते थे। सुबह, शाम आल्मा मैदान वर्तमान नरसिंह मैदान हॉकी खिलाड़ियों से भरा रहता था।
यह मास्साब के प्रशिक्षण का ही जादू था कि 70 के दशक में रानीखेत के हॉकी खिलाड़ियों का पूरे यूपी, उत्तराखंड में दबदबा था। बताते हैं कि 1971 में उन्होंने रानीखेत में अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता कराने में खासी भूमिका निभाई थी। मास्साब आगरा में जिला क्रीड़ा अधिकारी भी रहे। बाद में उन्होंने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में बतौर शारीरिक प्रशिक्षक कार्य किया।
1977 में 31 वर्ष की अल्पायु में ही खजान मास्साब का निधन हो गया, लेकिन दुर्भाग्य रहा कि जिस खिलाड़ी, कोच ने युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए जीवन समर्पित कर दिया, उसे पूरी तरह से भुला दिया गया। कई हॉकी प्रतियोगिताएं आज भी होती हैं, लेकिन खजान मास्साब का नाम कहीं नहीं दिखता।