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तो केसर उत्पादन के लिए मुफीद है रानीखेत की आबोहवा
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खनियां में इस तरह से लहलहा रही केसर की फसल। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ में केसर उत्पादन के जरिये किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना फिलहाल सफल होती दिख रही है। उद्यान विभाग ने यहां खनियां सहित तमाम स्थानों पर ट्रायल बेस पर केसर का उत्पादन किया है। खनियां में किसान नारायण सिंह अधिकारी की क्यारियां केसर की पौध से लहलहा रही हैं। उद्यान विभाग के अधिकारी कर्मचारी उन्हें खाद और पानी देने के तौर तरीके बता रहे हैं। बताया गया कि नियमित देखभाल से केसर के बल्बों का भी विकास होगा।
पहाड़ में केसर उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से ही केसर उत्पादन का कई स्थानों पर ट्रायल हो रहा है। निकटवर्ती खनियां, कालिका और पाखुड़ा, भड़गांव आदि स्थानों पर किसानों के यहां ट्रायल बेस पर केसर का उत्पादन किया गया है। जम्मू कश्मीर से इसके बल्ब मंगाकर ट्रायल बेस पर जिले के कई स्थानों पर किसान इसका उत्पादन कर रहे हैं। उद्यान विभाग भी किसानों को इसके उत्पादन और देखरेख की जानकारी दे रहे हैं। खनियां में उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने क्यारी देखी और केसर की पौध में खाद-पानी दिया। इससे बल्बों का विकास होगा। उद्यान अधिकारियों ने बताया कि केसर के बल्ब इस समय जमीन के अंदर हैं। 1.5 इंच व्यास से ऊपर वाले सभी बल्ब अगले साल अक्तूबर और नवंबर में केसर का उत्पादन देंगे। अप्रैल के बाद केसर में पतझड़ शुरू हो जाता है। जिले में कई स्थानों पर ट्रायल बेस पर केसर का उत्पादन हो रहा है। सभी जगह ग्रोथ अच्छी बताई जा रही है। केसर औषधीय पौधा है। बाजार में केसर की कीमत एक लाख से दो लाख रुपये किलो तक है, जबकि अच्छी किस्म के केसर की कीमत तीन लाख रुपये भी बताई जा रही है। वर्तमान में भारत में दिल्ली में केसर की बड़ी मंडी है। यदि पहाड़ में यह ट्रायल पूरी तरह से सफल हो जाता है तो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। पौधों की ग्रोथ देखकर उद्यान विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं।
- डीएम नितिन सिंह भदौरिया, जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। रानीखेत की आबोहवा केसर उत्पादन के लिए फिलहाल मुफीद लग रही है। ट्रायल में सभी जगह ग्रोथ अच्छी नजर आ रही है। अगले साल तक पौध केसर उत्पादन देंगे। यदि ट्रायल सफल रहता है तो फिर अन्य किसानों को भी उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाएगा। -भूपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ औद्यानिकी निरीक्षक, चिलियानौला, रानीखेत।
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पहाड़ में केसर उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से ही केसर उत्पादन का कई स्थानों पर ट्रायल हो रहा है। निकटवर्ती खनियां, कालिका और पाखुड़ा, भड़गांव आदि स्थानों पर किसानों के यहां ट्रायल बेस पर केसर का उत्पादन किया गया है। जम्मू कश्मीर से इसके बल्ब मंगाकर ट्रायल बेस पर जिले के कई स्थानों पर किसान इसका उत्पादन कर रहे हैं। उद्यान विभाग भी किसानों को इसके उत्पादन और देखरेख की जानकारी दे रहे हैं। खनियां में उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने क्यारी देखी और केसर की पौध में खाद-पानी दिया। इससे बल्बों का विकास होगा। उद्यान अधिकारियों ने बताया कि केसर के बल्ब इस समय जमीन के अंदर हैं। 1.5 इंच व्यास से ऊपर वाले सभी बल्ब अगले साल अक्तूबर और नवंबर में केसर का उत्पादन देंगे। अप्रैल के बाद केसर में पतझड़ शुरू हो जाता है। जिले में कई स्थानों पर ट्रायल बेस पर केसर का उत्पादन हो रहा है। सभी जगह ग्रोथ अच्छी बताई जा रही है। केसर औषधीय पौधा है। बाजार में केसर की कीमत एक लाख से दो लाख रुपये किलो तक है, जबकि अच्छी किस्म के केसर की कीमत तीन लाख रुपये भी बताई जा रही है। वर्तमान में भारत में दिल्ली में केसर की बड़ी मंडी है। यदि पहाड़ में यह ट्रायल पूरी तरह से सफल हो जाता है तो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। पौधों की ग्रोथ देखकर उद्यान विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं।
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- डीएम नितिन सिंह भदौरिया, जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। रानीखेत की आबोहवा केसर उत्पादन के लिए फिलहाल मुफीद लग रही है। ट्रायल में सभी जगह ग्रोथ अच्छी नजर आ रही है। अगले साल तक पौध केसर उत्पादन देंगे। यदि ट्रायल सफल रहता है तो फिर अन्य किसानों को भी उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाएगा। -भूपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ औद्यानिकी निरीक्षक, चिलियानौला, रानीखेत।
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