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आज भले ही सूना, कभी हाकी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता होती थी रानीखेत में

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 10:24 PM IST
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Hocky in Ranikhet
1977 में राष्ट्रीय हाकी प्रतियोगिता के फाइनल मैच में लाइनअप डेशू दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम विवि की ट - फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। आज भले ही रानीखेत में बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन बंद हो गया है लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब यहां हॉकी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता होती थी। मैदान का अभाव और शासन की उपेक्षा के चलते यह प्रतियोगिता 40 साल पहले दम तोड़ गई। आयोजकों ने इसे दोबारा शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन मैदान न मिलने के कारण प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हो सका।
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जिला क्रीड़ा संघ रानीखेत खेल संघ के बैनर तले सेना के नरसिंह मैदान में 1971 में शुरू हुई बिहारी लाल साह मेमोरियल अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेने पश्चिमी रेलवे मुंबई, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित देश की नामी टीमें यहां आती थीं। 1971 में पश्चिमी रेलवे मुंबई की टीम ने यूपी पुलिस सीतापुर की टीम को हराकर खिताब अपने नाम किया था। 1972 में हरियाणा राज्य विद्युत बोर्ड चंडीगढ़ ने आर्मी मेडिकल कोर को हराया। 1973 में पहली बार केआरसी ने प्रतियोगिता नरसिंह मैदान के बजाय सोमनाथ मैदान में कराई। तब ईएमई भोपाल ने एएमसी को शिकस्त दी थी। 1974 में कोर ऑफ सिग्नल जालंधर की टीम ने शक्ति क्लब जयपुर को हराया था। 1975 में यूपी सचिवालय लखनऊ ने यह खिताब जीता था। हॉकी संघ के जिलाध्यक्ष खेल आयोजक अगस्त लाल शाह ने बताया कि हॉकी को लेकर लोगों में खासी रुचि रहती थी। शासन स्तर से सहयोग और स्थानीय स्तर पर खेल मैदान के अभाव में यह प्रतियोगिता 1980 में बंद हो गई। राष्ट्रीय प्रतियोगिता शुरू कराने के कई प्रयास किए गए, लेकिन अब खेल मैदान नहीं है। प्रतियोगिता के लिए टीमों को पहले सूचना देनी पड़ती है। जो मैदान हैं, वह भी उबड़-खाबड़ हैं।
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कूशा, लाकरा, सैय्यद अली, मोहन सिंह चमके थे राष्ट्रीय फलक पर
रानीखेत। हॉकी संघ के जिलाध्यक्ष अगस्त लाल साह ने बताया कि वर्ष 1976 से लेकर 1978 तक केआरसी ने पुनर्मिलन समारोह के दौरान नरसिंह मैदान में यह प्रतियोगिता कराई। उन्होंने बताया कि कूशा, लाकरा, सैय्यद अली, यूपी के मोहन सिंह आदि इसी प्रतियोगिता में खेलकर राष्ट्रीय टीम में चुने गए। प्रतियोगिता के लिए क्रीड़ा संघ के महासचिव पूर्व कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष हेम चौधरी आदि भी भरपूर मेहनत करते थे। स्थानीय स्तर पर भी लाला विशंभर लाल अग्रवाल मेमोरियल हॉकी प्रतियोगिताएं होतीं थीं।
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