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लगातार घटता जा रहा है ऐतिहासिक पर्यटन नगरी का कद
अल्मोड़ा़,अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jun 2017 10:03 PM IST
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रानीखेत का प्रशासनिक भवन।
- फोटो : अमर उजाला
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ऐतिहासिक पर्यटन नगरी का कद निरंतर घटता जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था को ही ले लीजिए, उपमंडल का दर्जा प्राप्त इस नगरी की प्रशासनिक व्यवस्था ब्रिटिशकाल से ही कैंट बोर्ड मजिस्ट्रेट, सहायक आयुक्त और एडीएम जैसे अधिकारी संभालते थे, लेकिन राज्य बनने के बाद राजनीतिक प्रतिस्पर्घा के फेर में जनप्रतिनिधियों ने रानीखेत तहसील को छह पृथक तहसीलों में विभाजित कर दिया, अब प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी आईएएस नहीं वरन उपजिलाधिकारी संभाल रहे हैं।
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1876 में अंग्रेज हुक्मरानों ने रानीखेत तहसील का गठन किया। छावनी मजिस्ट्रेट के रूप में कर्नल आईएच चेनवर लाइन की नियुक्ति हुई। राजस्व क्षेत्रों की कमान तहसीलदार को सौंपी गई। 1924 मेें जीएस मिश्रा बतौर सहायक आयुक्त पहले प्रशासक बने। 1928 में गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी भी सहायक आयुक्त रहे। 1942 से 44 तक एलजे जॉनसन, आईसीएस सीपी गुप्ता, आजादी के बाद 1947 से 48 तक गैर कमीशन प्राप्त बीडी भंडारी, एचसी सक्सेना, एमएल दवे सहायक आयुक्त रहे। 1968 में आईएएस सुनीता चंद्रा पहली महिला सहायक आयुक्त रहीं।
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1976 से प्रशासनिक व्यवस्था आईएएस अधिकारी देखते थे। लीना जौहरी, अराधना पटनायक, विभापुरी दास, निवेदिता शुक्ल आदि भी संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर रहीं। अलग राज्य बनने के बाद उम्मीद थी कि रानीखेत जिला और नगरपालिका का गठन होगा और पर्यटन नगरी का तेजी से विकास होगा, लेकिन रानीखेत तहसील से काटकर सल्ट, द्वाराहाट, चौखुटिया तहसीलें बना दी गईं। अब यहां की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी उपजिलाधिकारी संभाल रहे हैं, जिन नई तहसीलों का गठन किया गया, वहां अधिकारी कर्मचारियों का अभाव बना हुआ है।
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