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सेहत के साथ स्वाद भी बढ़ाएंगी वैज्ञानिक तकनीक से उत्पादित पौष्टिक दालें
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ताड़ीखेत के गांवों में वैज्ञानिक विधि से दाल बोते काश्तकार।
- फोटो : AMAR UJALA
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संवाद न्यूज़ एजेंसी, रानीखेत (अल्मोड़ा)। वैज्ञानिक तकनीक से बोई गई पहाड़ की पारंपरिक दालें अब न सिर्फ सेहत सुधारेंगी, वरन मुंह का स्वाद भी बढ़ाएंगी। इस विधि से किसानों को भी फायदा होगा।
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पहली बार ताड़ीखेत ब्लॉक के पांच गांव शेलंगी, हिडाम, बएडी, मटेला मनिहार और सोंखला आदि गांवों की छह सौ नाली भूमि में किसानों ने बुआई का कार्य पूरा कर लिया है। नई तकनीक को लेकर किसान भी उत्साहित हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा होप संस्था के सयुंक्त तत्वावधान में किसानों को कृषि की उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। संस्था प्रमुख प्रकाश जोशी ने बताया कि एक नाली भूमि में 30 कुंतल सड़ी हुई गोवर की खाद तथा एक किलो बायो फर्टिलाइजर की जरूरत होती है।
गोबर की खाद डालने से भूमि की पानी शोषित करने की क्षमता बढ़ जाती है। बीज को लाइन से बोया जाता है, जिससे बीज भी कम लागत है। किसान काशी राम ने बताया कि पूर्व में जहां वह प्रति नाली तीन से चार किलो बीज बोते थे, अब मात्र 800 से एक हजार ग्राम बीज पर्याप्त हो जा रहा है। कृषक राजेन्द्र प्रसाद, धनी राम और नरेंद्र ने बताया कि मेहनत कम लग रही है, आज तक इस विधि की उन्हें प्रयोगात्मक जानकारी नहीं दी गई थी। पुरानी विधि से बीज का दुरुपयोग अधिक होता है। कड़ी मेहनत के बावजूद पर्याप्त उत्पादन भी नहीं हो पा रहा था। अब भविष्य में वैज्ञानिक तकनीक से ही खेती होगी।
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ताड़ीखेत के गांवों में वैज्ञानिक विधि से दाल बोते काश्तकार।
- फोटो : AMAR UJALA
ताड़ीखेत के गांवों में वैज्ञानिक विधि से दाल बोते काश्तकार।