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एक सीट मजबूत करने में पांच सीट का न हो जाए नुकसान
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Gairsain Mandal of Uttarakhand
अल्मोड़ा। गैरसैंण मंडल बनाए जाने के बाद उसमें अल्मोड़ा जिले को शामिल करना यहां के लोगों को रास नहीं आ रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर भाजपा अपना फैसला नहीं बदलती है तो एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका फायदा कांग्रेस या नया दमखम दिखा रही आप पार्टी को मिल सकता है।
अल्मोड़ा जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रानीखेत और जागेश्वर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी की चार सीटें सल्ट, अल्मोड़ा, सोमेश्वर और द्वाराहाट में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। रानीखेत विधानसभा सीट भी भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट बहुत ही कम अंतर से हारे थे। कहा तो यह भी जाता है कि अगर अजय भट्ट चुनाव जीत जाते तो आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते। नए गैरसैंण मंडल में जाने का फायदा अगर किसी विधानसभा सीट को मिलता दिख रहा है तो वह केवल द्वाराहाट विधानसभा सीट है।
इस विधानसभा सीट की गैरसैंण से कम दूरी है। हालांकि अल्मोड़ा की जनभावना से जुड़े लोग वहां भी सरकार के फैसले के विरोध में हैं। इधर बाकी की पांच विधानसभा सीट पर अल्मोड़ा को गैरसैंण में शामिल किए जाने का जमकर विरोध हो रहा है। शुरूआती दिनों में तो सल्ट विधानसभा क्षेेत्र के लोग सरकार के इस फैसले के साथ दिखे थे लेकिन बाद में वह भी सरकार के फैसले के खिलाफ ही जाते नजर आ रहे हैं।
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जो जन आंदोलन हो रहे हैं या जो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं उससे पता चलता है कि भाजपा को गैरसैंण मंडल में अल्मोड़ा जिले को शामिल किए जाने के फैसले के कारण राजनीतिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता एक सुर में कुुमाऊं का मतलब अल्मोड़ा होना बता रही है। ऐसे में अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो विरोधी दल इस मामले को और भी ज्यादा तूल देते जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहना शुरू ही कर दिया है कि हमारी सरकार आई तो गैरसैंण को जिला बनाएंगे। पूर्व सीएम की इस बात से साबित हो गया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव में उठाकर सियासी फायदा देने की कोशिश जरूर करेगी।
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अल्मोड़ा जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रानीखेत और जागेश्वर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी की चार सीटें सल्ट, अल्मोड़ा, सोमेश्वर और द्वाराहाट में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। रानीखेत विधानसभा सीट भी भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट बहुत ही कम अंतर से हारे थे। कहा तो यह भी जाता है कि अगर अजय भट्ट चुनाव जीत जाते तो आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते। नए गैरसैंण मंडल में जाने का फायदा अगर किसी विधानसभा सीट को मिलता दिख रहा है तो वह केवल द्वाराहाट विधानसभा सीट है।
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इस विधानसभा सीट की गैरसैंण से कम दूरी है। हालांकि अल्मोड़ा की जनभावना से जुड़े लोग वहां भी सरकार के फैसले के विरोध में हैं। इधर बाकी की पांच विधानसभा सीट पर अल्मोड़ा को गैरसैंण में शामिल किए जाने का जमकर विरोध हो रहा है। शुरूआती दिनों में तो सल्ट विधानसभा क्षेेत्र के लोग सरकार के इस फैसले के साथ दिखे थे लेकिन बाद में वह भी सरकार के फैसले के खिलाफ ही जाते नजर आ रहे हैं।
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जो जन आंदोलन हो रहे हैं या जो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं उससे पता चलता है कि भाजपा को गैरसैंण मंडल में अल्मोड़ा जिले को शामिल किए जाने के फैसले के कारण राजनीतिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता एक सुर में कुुमाऊं का मतलब अल्मोड़ा होना बता रही है। ऐसे में अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो विरोधी दल इस मामले को और भी ज्यादा तूल देते जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहना शुरू ही कर दिया है कि हमारी सरकार आई तो गैरसैंण को जिला बनाएंगे। पूर्व सीएम की इस बात से साबित हो गया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव में उठाकर सियासी फायदा देने की कोशिश जरूर करेगी।