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Almora News: तीन युद्ध लड़ने वाले पूर्व सैनिक हरि दत्त जोशी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

Sun, 11 Jan 2026 10:17 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 11 Jan 2026 10:17 PM IST
सार

तीन युद्ध लड़ने वाले योद्वा सेवानिवृत लांस नायक हरि दत्त जोशी का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

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Former soldier Hari Dutt Joshi, who fought in three wars, has passed away, plunging the region into mourning
सेवानिवृत लांस नायक हरि दत्त जोशी। फाइल फोटो - फोटो : संवाद

विस्तार

 भारत मां की रक्षा के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले योद्वा सेवानिवृत लांस नायक हरि दत्त जोशी का निधन हो गया है। वह 90 साल के थे। तीनों युद्धों में उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाएं थे। उनके निधन पर पूर्व सैनिकों और विभिन्न संगठनों ने शोक जताया है।
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तीन युद्धों के वीर हरि दत्त जोशी का जन्म बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के सुलमती गांव में हुआ था। वर्तमान में वह नगर के पांडेखोला में रहते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सेना में भर्ती हो गए। भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्स साहस दिखाया। तीनों युद्धों में उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए कई दुश्मनों को ढेर किया। परिजनों के मुताबिक वह काफी फुर्तीले थे। युद्ध के दौरान उनकी फुर्ती के चलते कई बार वह दुश्मन से बच निकले। 1973 में सिक्स कुमाऊं बटालियन से लांस नायक पद से सेवानिवृत होने के बाद वह अपने गांव सुलमती में बस गए। उनके बड़े पुत्र बसंत जोशी जीआईसी खातिरकेती में अर्थशास्त्र विषय में अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने यहां पांडेखोला में मकान बनाया है। हरी दत्त भी उनके परिवार के साथ ही रहते थे। शनिवार को उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी नंदी जोशी समेत नाती पोतो समेत भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए हैं।
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दादा से पोते-पोतियों ने सुनी जंग की कहानी

योद्धा हरी दत्त जोशी नाती पोतो को युद्ध की कहानी सुनाते थे। कमल जोशी, खुशी जोशी, रियांश, चंदू दादा से जंग की कहानी सुनकर रोमांचित हो जाते थे। उनके वीरता के चर्चे गांव में होते थे। हरि दत्त जोशी युवाओं को हमेशा सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनके छोटे पुत्र हरीश जोशी जीआईसी सैंज में भूगोल के अतिथि प्रवक्ता है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृति के बाद भी पिता को सेना से प्यार था।
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