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Almora News: दिव्यांग बेटे को मारने की कोशिश, राहगीरों ने रोका; पिता के मंसूबे पर फिरा पानी

Wed, 16 Jul 2025 03:00 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 16 Jul 2025 03:00 PM IST
सार

स्याल्दे में एक पिता ने अपने 12 वर्षीय दिव्यांग बेटे का गला घोंट कर मारने का प्रयास किया उसी समय वहां से कुछ राहगीर गुजर रहे थे जिससे उसके मंसूबे पर पानी फिर गया। 

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Father tried to kill his handicapped son in almora
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे में एक पिता ने अपने 12 वर्षीय दिव्यांग बेटे का गला घोंट कर मारने का प्रयास किया उसी समय वहां से कुछ राहगीर गुजर रहे थे जिससे उसके मंसूबे पर पानी फिर गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।

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स्याल्दे विकासखंड के एक गांव के तोक निवासी एक व्यक्ति अंबाला में प्राइवेट नौकरी करता है। छुट्टियों में वह घर आया था। बीते एक जून को वह अपने 12 वर्षीय दिव्यांग पुत्र को पढ़ाई कराने के बहाने से साथ ले गया। कुछ समय वहां रहने के बाद 14 जुलाई की शाम बस से अपने पुत्र के साथ गांव लौटा। उसने देघाट का टिकट लिया लेकिन स्टेशन से 12 किमी पहले ही स्याल्दे के पास सुनसान जगह पैठाना और जसपुर गांव की सरहद पर उतर गया।

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यहां पर उसने अपने दिव्यांग पुत्र की गला दबाकर मारने की कोशिश की। बेटे को शीतलपेय पदार्थ में गोली मिलाकर पिलाई जिससे वह बेहोश हो गया। इस दौरान कुछ राहगीर वहां से गुजर रहे थे। राहगीर दोनों को चंपानगर लाए। वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने देघाट थाने को सूचना दी। पुलिस ने बेहोश बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याल्दे में भर्ती कराया जहां उसका उपचार चल रहा है।

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होश आने पर खुद को अस्पताल में पाया तो रोने लगा नाबालिग
नाबालिग दिव्यांगता को मात देकर हौसलों की उड़ान भर रहा था। वह भी सामान्य बच्चे की तरह ही अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहता था लेकिन पिता के सिर पर घर के चिराग को बुझाने का खून सवार था। पिता की हरकत से मासूम सहमा हुआ है। नाबालिग ने बताया कि पांचवीं पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह पापा के साथ गया था। पापा उसे क्यों मारना चाहते हैं ये उसे भी पता नहीं है। उसने बताया कि पिता उसे मरने के लिए कह रहे थे। सुनसान जगह पर पहले एक गोली खिलाई जिसके बाद उसके मुंह से खून आने लगा। बाद में रुमाल से गला दबाया। इसके बाद जब उसे होश आया तो अस्पताल में था। पिता की करतूत से उसके आंसू थम नहीं रहे थे।


नाबालिग के लिए फरिश्ता बने राहगीर
जाको राखे साईयां मार सके न कोई... यह कहावत उस समय चरितार्थ हुई जब एक पिता अपने बच्चे का गला घोट रहा था। एक कहावत है कि मारने वाले से बचाने वाला बलवान होता है। सुनसान जगह पर जब बाप ने बच्चे का गला घोटना चाहा तो उसी समय वहां कुछ राहगीर आ गए। इससे बच्चे की जान बच गई। नाबालिग के लिए राहगीर फरिश्ता बन कर आए।


परिजनों ने इस मामले में कोई भी तहरीर नहीं दी है। आरोपी पिता को समझा दिया है कि वह भविष्य में ऐसा दोबारा न करे। अगर तहरीर मिलती तो कार्रवाई की जाएगी। - विमल प्रसाद, सीओ रानीखेत।

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