Almora News: दवा कंपनी के निजीकरण के विराेध गरजे कर्मचारी, सामाजिक संगठनों ने दिया समर्थन; धरना प्रदर्शन किया
मोहान में वर्षों पहले स्थापित दवा फैक्ट्री आईएमपीसीएल के निजीकरण के विरोध में अब कर्मचारी खुलकर आमने सामने आ गए हैं। कंपनी के करीब 500 कर्मचारियों ने गुरुवार से फैक्ट्री परिसर में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है।
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मोहान में वर्षों पहले स्थापित दवा फैक्ट्री आईएमपीसीएल के निजीकरण के विरोध में अब कर्मचारी खुलकर आमने सामने आ गए हैं। कंपनी के करीब 500 कर्मचारियों ने गुरुवार से फैक्ट्री परिसर में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है। कर्मचारियों के इस आंदोलन को कांग्रेस, उपपा समेत अनेक राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है।
गुरुवार से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कर्मचारी फैक्ट्री परिसर में पहुंचे और उन्होंने यहां कंपनी के निजीकरण के विरोध में नारेबाजी शुरु कर दी। कर्मचारियों का कहना था वह लंबे समय से इस फैक्ट्री को पूरी ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में करीब पांच सौ से अधिक कर्मचारियों के परिवार रोजी रोटी के लिए इसी फैक्ट्री के सहारे हैं। लेकिन इसके बाद भी इस फैक्ट्री के निजीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पूर्व विधायक रंजीत रावत ने कहा है आईएमपीसीएल फैक्ट्री की स्थापना तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने पर्वतीय क्षेत्रों की जैव विविधता को देखते हुए किया था। जिसके बाद पहाड़ की जड़ी बूटियों से बनी दवाएं देश विदेश तक भेजी जाती थी। लेकिन अब सरकार इसका निजीकरण पहाड़ की जैव विविधता और कर्मचारी हितों से खिलवाड़ कर रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपपा नेता और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
करोड़ों रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही कंपनी
आईएमपीसीएल फैक्ट्री मोहान के पास 1200 प्रकार की शास्त्रीय औषधि निर्माण के लाइसेंस हैं। फैक्ट्री द्वारा उच्च गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक एंव 125 प्रकार की यूनानी औषिधयों का निर्माण कर देश के केंद्रीय अस्पतालों, रिसर्च संस्थानों व राज्य सरकार के अस्पतालों में भेजी जाती हैं। कोरोना काल के दौरान इस फैक्ट्री में आयुष रक्षा किटों का निर्माण भी किया गया।
ये रहे मौजूद
उमित लोहनी, कैलाश शर्मा, भूपेंद्र अधिकारी, कुंदन मेहरा, मो. अब्दुल नईम, हिमांशु आदि। संचालन जयपाल रावत ने किया।