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डगमगा रहा द्वाराहाट का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
द्वाराहाट (अल्मोड़ा), अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jul 2017 09:44 PM IST
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द्वाराहाट का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- फोटो : amar ujala
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द्वाराहाट की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली का दंश झेल रही हैं। बड़े क्षेत्र के लिए स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाक्टरों के अभाव में खुद बीमार है। चिकित्सकों के 10 पदों के सापेक्ष वर्तमान में यहां मात्र दो चिकित्सक तैनात हैं। प्रतिस्थानी के बगैर केंद्र के प्रभारी डा.वीपी सिंह का स्थानांतरण खटीमा कर दिया गया है, आशंका जताई जा रही है कि अब उनकी पत्नी महिला रोग विशेषज्ञ डा.ममता सिंह का भी स्थानांतरण हो सकता है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों में आक्रोश पनपने लगा है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फिजिशियन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, एनस्थेसिया, रेडियोलाजिस्ट, डेंटल सर्जन, दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रभारी चिकित्साधिकारी, उप चिकित्साधिकारी सहित 10 पद सृजित हैं, वर्तमान में यहां मात्र दो चिकित्सक तैनात हैं। जबकि द्वाराहाट नगर के अलावा जालली सहित दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से यहां रोगी पहुंचते हैं, लेकिन डाक्टरों के अभाव के चलते उन्हें प्राइवेट क्लीनिकों में महंगा उपचार कराना पड़ रहा है।
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17 जून को प्रभारी चिकित्साधिकारी अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. वीपी सिंह का तबादला खटीमा कर दिया गया है। उनकी पत्नी महिला रोग विशेषज्ञ डा. ममता सिंह के भी स्थानांतरण की चर्चाएं हैं, प्रभारी चिकित्साधिकारी के स्थान पर अब 11 किमी दूर असगोली ऐलोपैथिक चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डा. रविशंकर को यहां का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यहां नियुक्त डा.रविंद्र सिंह मेर अप्रैल से अवकाश पर हैं। दूसरी महिला चिकित्सक डा. सीमा एक साल पूर्व भिकियासैंण अस्पताल भेजा गया है, हालांकि वह यहां अटैचमेंट पर थीं, डा. बदरूल कमर भी ईद की छुट्टियों से नहीं लौटे हैं। जिसके चलते उपचार में भारी दिक्कतें आ रही हैं। यहां इंजीनियरिंग कालेज, पालीटेक्निक सहित तमाम तकनीकी संस्थान भी हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने से लोग परेशान हो रहे हैं।
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धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 2002 में स्वीकृत अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। 2015 में आंदोलन के बाद दन्या के रेडियोलाजिस्ट डा. केसी पंत को महीने में दो बार यहां आकर अल्ट्रासाउंड करने के निर्देश दिए गए, कुछ समय तक यह सिलसिला चला। लेकिन पिछले एक साल से यह व्यवस्था भी ठप है। रोगियों को रानीखेत अथवा अन्यत्र जाना पड़ रहा है। इधर, अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी का प्रभार देख रहे डा. रविशंकर ने बताया कि विभाग की हर बैठक में डाक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया जाता है। शासन स्तर से शीघ्र ही यहां चिकित्सकों के नियुक्त होने की उम्मीद है।