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दूसरे दिन भी गरमाया कॉलेज का माहौल
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अल्मोड़ा के एसएसजे विवि. में एनएसयूआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं में होती नोकझोंक।
- फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। शिलापट से शुरू होकर एसएसजे परिसर में स्मैक के अड्डे के सुबूत मिलने के दूसरे दिन मंगलवार को एक बार फिर एबीवीपी और एनएसयूआई आमने-सामने आ गए। इस दौरान कॉलेज परिसर में जमकर बहस हुई। विद्यार्थी परिषद ने छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कॉलेज प्रशासन और एनएसयूआई का पुतला भी फूंका। जमकर नारेबाजी भी की गई। एक दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने अलग-थलग किया। मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की बुधवार को बैठक होगी। छात्रों ने परिसर निदेशक के खिलाफ भी नारेबाजी की।
छात्रसंघ पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर एसएसजे विश्वविद्यालय में मामला गरमाया था। पिछले दिनों एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने निदेशक प्रो. जगत सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंप छात्रसंघ कार्यकारिणी भंग करने की मांग उठाई थी। साथ ही उन्होंने शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों का नाम भी मिटाया था। बीते दिवस प्रकरण में कॉलेज प्रशासन ने एनएसयूआई के सामने छात्रसंघ भवन का निरीक्षण किया तो वहां स्मैक का सेवन करने में प्रयोग की जाने वाली सिलवर फॉयल, दस का नोट समेत अन्य धूम्रपान से जुड़ी सामग्री मिली। यह देखकर विद्यार्थियाें समेत कॉलेज प्रशासन भी सकते में आ गया। इधर, बुधवार को फिर मामला गरमाया रहा। सुबह एबीवीपी, एनएसयूआई के छात्रों ने परिसर पहुंचकर जमकर बवाल किया। दोनों के बीच काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। कोतवाल हरेंद्र चौधरी टीम के साथ कॉलेज पहुंचे और धारा 144 का हवाला देते हुए हंगामा कर रहे छात्रों को तितर-बितर किया। एबीवीपी ने छात्रसंघ पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कॉलेज प्रशासन और एनएसयूआई का पुतला भी फूंका।
एबीवीपी की सीओ से जांच की मांग
अल्मोड़ा। शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों के नाम मिटाने और भवन में मिले स्मैक से जुड़ी सामग्री मिलने से एबीवीपी में भारी नाराजगी है। मंगलवार को एबीवीपी के छात्रों ने पुलिस उपाधीक्षक वीर सिंह को ज्ञापन सौंप मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। जांच नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी।
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ज्ञापन में वक्ताओं ने कहा कि एनएसयूआई ने जिस तरह से शिलापट से नाम मिटाकर अराजकता का माहौल बनाया ये पूरी तरह गलत है। लेकिन भवन में स्मैक के मामले को लेकर रचे गए कृत्य से विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। छात्रों ने सीओ से कहा कि शिलापट से नाम मिटाने और छात्रसंघ भवन में किए गए कृत्य के मामले की पूरी जांच की जाए। इस दौरान छात्रों ने मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी। ज्ञापन देने वालों में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र चंद्र जोशी, वरुन कपकोटी आदि रहे।
एनएसयूआई ने भी कहा जांच होनी चाहिए
अल्मोड़ा। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जांच नहीं होने पर नाराजगी जताई है। सोमवार को प्रभारी निदेशक प्रो. जया उप्रेती और कार्यवाहक डीएसडब्ल्यू नीरज तिवारी से एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने वार्ता की। उन्होंने अब तक मामले में जांच के बारे में जानकारी भी ली। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रसंघ भवन में स्मैक के सुबूत मिले हैं। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई कहां तक पहुंची इसकी जानकारी छात्रों को भी होनी चाहिए। इस पर प्रभारी निदेशक जया उप्रेती ने बुधवार को कमेटी की बैठक के बाद कार्रवाई की बात कही है।
मानहानि का दावा कर सकते हैं छात्रसंघ पदाधिकारी
अल्मोड़ा। छात्रसंघ पदाधिकारियों ने जांच नहीं होने पर मानहानि का दावा करने की बात भी कही है। वक्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि एनएसयूआई ने छात्रसंघ पदाधिकारियों पर 1.53 लाख रुपये सिर्फ मिठाई पर खर्च करने की बात कही है जो पूरी तरह गलत है। अब तक किसी भी छात्रसंघ पदाधिकारी को ऐसी कोई राशि नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि गलत तरह से बयानबाजी कर छात्रसंघ पदाधिकारियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर दो दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वह मानहानि का दावा करेंगे। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष दीपक उप्रेती, सचिव नवीन कनवाल, छात्रा उपाध्यक्ष मेघा डसीला, कोषाध्यक्ष राहुल अधिकारी आदि मौजूद रहे।
निदेशक स्वास्थ्य संबंधित अवकाश पर हैं, मामले में पूरी तरह जांच की जाएगी। बुधवार को कमेटी की बैठक होगी और हर पहलू देखे जाएंगे।
-प्रो. जया उप्रेती, कार्यवाहक निदेशक।
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छात्रसंघ पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर एसएसजे विश्वविद्यालय में मामला गरमाया था। पिछले दिनों एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने निदेशक प्रो. जगत सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंप छात्रसंघ कार्यकारिणी भंग करने की मांग उठाई थी। साथ ही उन्होंने शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों का नाम भी मिटाया था। बीते दिवस प्रकरण में कॉलेज प्रशासन ने एनएसयूआई के सामने छात्रसंघ भवन का निरीक्षण किया तो वहां स्मैक का सेवन करने में प्रयोग की जाने वाली सिलवर फॉयल, दस का नोट समेत अन्य धूम्रपान से जुड़ी सामग्री मिली। यह देखकर विद्यार्थियाें समेत कॉलेज प्रशासन भी सकते में आ गया। इधर, बुधवार को फिर मामला गरमाया रहा। सुबह एबीवीपी, एनएसयूआई के छात्रों ने परिसर पहुंचकर जमकर बवाल किया। दोनों के बीच काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। कोतवाल हरेंद्र चौधरी टीम के साथ कॉलेज पहुंचे और धारा 144 का हवाला देते हुए हंगामा कर रहे छात्रों को तितर-बितर किया। एबीवीपी ने छात्रसंघ पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कॉलेज प्रशासन और एनएसयूआई का पुतला भी फूंका।
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एबीवीपी की सीओ से जांच की मांग
अल्मोड़ा। शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों के नाम मिटाने और भवन में मिले स्मैक से जुड़ी सामग्री मिलने से एबीवीपी में भारी नाराजगी है। मंगलवार को एबीवीपी के छात्रों ने पुलिस उपाधीक्षक वीर सिंह को ज्ञापन सौंप मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। जांच नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी।
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ज्ञापन में वक्ताओं ने कहा कि एनएसयूआई ने जिस तरह से शिलापट से नाम मिटाकर अराजकता का माहौल बनाया ये पूरी तरह गलत है। लेकिन भवन में स्मैक के मामले को लेकर रचे गए कृत्य से विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। छात्रों ने सीओ से कहा कि शिलापट से नाम मिटाने और छात्रसंघ भवन में किए गए कृत्य के मामले की पूरी जांच की जाए। इस दौरान छात्रों ने मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी। ज्ञापन देने वालों में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र चंद्र जोशी, वरुन कपकोटी आदि रहे।
एनएसयूआई ने भी कहा जांच होनी चाहिए
अल्मोड़ा। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जांच नहीं होने पर नाराजगी जताई है। सोमवार को प्रभारी निदेशक प्रो. जया उप्रेती और कार्यवाहक डीएसडब्ल्यू नीरज तिवारी से एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने वार्ता की। उन्होंने अब तक मामले में जांच के बारे में जानकारी भी ली। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रसंघ भवन में स्मैक के सुबूत मिले हैं। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई कहां तक पहुंची इसकी जानकारी छात्रों को भी होनी चाहिए। इस पर प्रभारी निदेशक जया उप्रेती ने बुधवार को कमेटी की बैठक के बाद कार्रवाई की बात कही है।
मानहानि का दावा कर सकते हैं छात्रसंघ पदाधिकारी
अल्मोड़ा। छात्रसंघ पदाधिकारियों ने जांच नहीं होने पर मानहानि का दावा करने की बात भी कही है। वक्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि एनएसयूआई ने छात्रसंघ पदाधिकारियों पर 1.53 लाख रुपये सिर्फ मिठाई पर खर्च करने की बात कही है जो पूरी तरह गलत है। अब तक किसी भी छात्रसंघ पदाधिकारी को ऐसी कोई राशि नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि गलत तरह से बयानबाजी कर छात्रसंघ पदाधिकारियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर दो दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वह मानहानि का दावा करेंगे। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष दीपक उप्रेती, सचिव नवीन कनवाल, छात्रा उपाध्यक्ष मेघा डसीला, कोषाध्यक्ष राहुल अधिकारी आदि मौजूद रहे।
निदेशक स्वास्थ्य संबंधित अवकाश पर हैं, मामले में पूरी तरह जांच की जाएगी। बुधवार को कमेटी की बैठक होगी और हर पहलू देखे जाएंगे।
-प्रो. जया उप्रेती, कार्यवाहक निदेशक।