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डोली योजना पहाड़ों में साबित हो रही कारगर
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अल्मोड़ा। पहाड़ों में सड़क विहीन दुर्गम इलाकों से गर्भवती महिलाओं को मुख्य मार्ग या अस्पताल तक ले जाने वाली डोली योजना कारगर साबित हो रही है। योजना में हर साल गर्भवती महिलाओं को सुदूर क्षेत्रों से डोली में अस्पताल पहुंचाने वाले मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। साल भर में 20 मामलों के लक्ष्य निर्धारित कर शुरू हुई योजना से अब 120 लोगों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
पहाड़ों में सुदूर क्षेत्रों में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 आपातकालीन सेवा की तर्ज पर डोली योजना के नाम से महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। जिन स्थानों में मोटरमार्ग की व्यवस्था नहीं हैं, वहां श्रमिक, ग्रामीण या कोई भी व्यक्ति गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सुदूर क्षेत्रों से अस्पताल या मोटरमार्ग तक डोली के माध्यम से पहुंचाते हैं। डोली से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने वालों को सरकार की ओर से धनराशि दी जाती है। पांच साल पूर्व शुरू हुई योजना के लिए जिले में मात्र 20 केसों का लक्ष्य रखा गया था। साल भर में 20 से कम ही केस सामने आए लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे योजना का लक्ष्य बढ़ने लगा है। कुछ ही वर्षों में योजना के तहत अब 120 का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। हालांकि 120 से अधिक मामले आने के बाद भी लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा लेकिन रिपोर्ट के तहत अब तक 120 का लक्ष्य तय किया गया है।
धीरे-धीरे बढ़ाया लक्ष्य
अल्मोड़ा। एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट ने बताया कि योजना के तहत जिले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। 2015 में योजना शुरू होते समय साल में 20 केसों का लक्ष्य निर्धारित कर रिपोर्ट भेजी गई थी। 20 लोगों को योजना का लाभ मिला। अगले ही साल इसमें अधिक मामले प्रकाश में आए तो इसको बढ़ाया गया। अब जाकर लगातार मामले बढ़ने से 120 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डोली से अस्पताल लाने वालों को पूर्व में एक हजार रुपये दिए जाते थे लेकिन अब सरकार ने इसे दो हजार रुपये कर दिया है।
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किस साल कितने रखे थे लक्ष्य
2015 - 20 केस
2016 - 60 केस
2017 - 60 केस
2018 - 90 केस
2019 - 120 केस
2020 - 120 केस
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पहाड़ों में सुदूर क्षेत्रों में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 आपातकालीन सेवा की तर्ज पर डोली योजना के नाम से महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। जिन स्थानों में मोटरमार्ग की व्यवस्था नहीं हैं, वहां श्रमिक, ग्रामीण या कोई भी व्यक्ति गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सुदूर क्षेत्रों से अस्पताल या मोटरमार्ग तक डोली के माध्यम से पहुंचाते हैं। डोली से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने वालों को सरकार की ओर से धनराशि दी जाती है। पांच साल पूर्व शुरू हुई योजना के लिए जिले में मात्र 20 केसों का लक्ष्य रखा गया था। साल भर में 20 से कम ही केस सामने आए लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे योजना का लक्ष्य बढ़ने लगा है। कुछ ही वर्षों में योजना के तहत अब 120 का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। हालांकि 120 से अधिक मामले आने के बाद भी लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा लेकिन रिपोर्ट के तहत अब तक 120 का लक्ष्य तय किया गया है।
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धीरे-धीरे बढ़ाया लक्ष्य
अल्मोड़ा। एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट ने बताया कि योजना के तहत जिले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। 2015 में योजना शुरू होते समय साल में 20 केसों का लक्ष्य निर्धारित कर रिपोर्ट भेजी गई थी। 20 लोगों को योजना का लाभ मिला। अगले ही साल इसमें अधिक मामले प्रकाश में आए तो इसको बढ़ाया गया। अब जाकर लगातार मामले बढ़ने से 120 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डोली से अस्पताल लाने वालों को पूर्व में एक हजार रुपये दिए जाते थे लेकिन अब सरकार ने इसे दो हजार रुपये कर दिया है।
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किस साल कितने रखे थे लक्ष्य
2015 - 20 केस
2016 - 60 केस
2017 - 60 केस
2018 - 90 केस
2019 - 120 केस
2020 - 120 केस