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खानाबदोशों सा जीवन जी रहे आपदा पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो, धौलछीना/अल्मोड़ा।
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:52 PM IST
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आपदा प्रभावित गांव
- फोटो : अमर उजाला
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धौलछीना/अल्मोड़ा। 2010, 2012 में आई आपदा के बाद भैंसियाछाना ग्रामसभा के खैरखेत और बूढ़ाधार तोकों के प्रभावित 10 परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। उसके बाद 2012 में भी भूस्खलन के बाद चार अन्य परिवारों को भी गांव से हटा दिया गया। इनमें से छह परिवार जूनियर हाईस्कूल खैरखेत के भवन में रह रहे हैं। 2012 में विस्थापित किए गए चार परिवारों ने अन्य लोगों के घरों में शरण ली है। इसके लिए भूमि के आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आवास बनाने का काम शुरूनहीं हुआ है।
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भैंसियाछाना ब्लॉक के खैरखेत गांव की पहाड़ी में पिछले कई सालों से भूस्खलन हो रहा है। 2010 में इस गांव में भारी भूस्खलन के बाद अनेक ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन बरबाद हो गई। खतरे की जद में आए छह परिवारों को घर छोड़ने पड़े। इनमें गोविंद राम, सुजान राम, बहादुर राम, दनी राम, किशन राम, हरीश राम के परिवार शामिल हैं। इन परिवारों को खैरखेत में स्थित जूनियर हाईस्कूल में शरण दी गई है। इन लोगों के जानवरों को गांव के पंचायत घर में जगह दी गई है।
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उसके बाद 2012 में दोबारा हुए भूस्खलन के बाद गोपाल सिंह, गोविंदी देवी, बहादुर सिंह, कुंदन सिंह के परिवारों को भी घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। सरकार के आदेश पर इन परिवारों को गांव के आसपास सुरक्षित स्थानों में किराए पर आवास दिलाए गए। सरकार के आदेश पर शुरू में किराए की धनराशि का भुगतान प्रशासन द्वारा किया गया, लेकिन पिछले कई सालों से अब उन्हें किराए का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। इन सभी परिवारों की स्थिति खानाबदोशों जैसी हो गई है। यह लोग किसी तरह मजदूरी आदि करके जीवन यापन कर रहे हैं।
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बूढ़ाधार, खैरखेत तोकों में रहने वाले इन 10 परिवारों के साथ ही अन्य घरों को भी बरसात में खतरा उत्पन्न हो जाता है। दोनों तोक ही भूस्खलन से खतरे की जद में हैं और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इन परिवारों को सुरक्षित स्थान में शिफ्ट करने का सुझाव दिया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने गांव के पास ही एक सुरक्षित जगह पर सभी परिवारों के घर बनाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली है।
इस जगह पर सभी परिवारों को एक-एक नाली भूमि आवंटित की जा रही है। प्रभावित ग्रामीणों की मांग है कि सरकार को उनके लिए शीघ्र आवास का निर्माण करना चाहिए, लेकिन इस ओर कुछ नहीं किया जा रहा है। एक साल पहले प्रशासन ने इस स्थल पर पानी, बिजली की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके लिए भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।