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16 साल बाद भी सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों का पारा चढ़ा, प्रदर्शन किया
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अल्मोड़ा। स्वीकृति के 16 साल बाद भी चेलछीना-बसंतपुर-जैंती मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने पंचायत भवन के समक्ष धरना दिया और नारेबाजी कर विरोध जताया। धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने सड़क जल्द नहीं बनने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी। सड़क नहीं होने से गांव के लोगों को भारी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 2005 में 10 किमी लंबा चेलछीना-बसंतपुर-जैंती मार्ग स्वीकृत हुआ था। स्वीकृति के 16 साल गुजर जाने के बावजूद अब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सड़क न होने के कारण ग्रामीण रोगी और प्रसव पीड़िताओं को डोली में मुख्य मार्ग तक ले जाते हैं। कई बार रोगी की हालत गंभीर होने पर वह रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
यातायात सुविधा नहीं होने के कारण गांव से लगातार पलायन बढ़ रहा है। लंबे समय से मांग के बावजूद अब तक गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनी तो त्यूनरा, रौसिला, बडियारैत, टिकर, रणक, नया संग्रौली आदि गांवों के लोगों को यातायात सुविधा का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले नेता गांव में वोट मांगने आते हैं और ग्रामीणों से सड़क बनाने समेत तमाम बड़े दावे करते हैं। चुनाव के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते हैं। धरने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश सिंह नेगी, ग्राम प्रधान हंसी देवी, पंकज नेगी, सुंदर सिंह, चंदन सिंह, गौरव, गिरीश, भूपाली, सोनू, अमित, अर्जुन, भूपाल, जगदीश, राकेश, हयात आदि बैठे।
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उन्होंने कहा कि 2005 में 10 किमी लंबा चेलछीना-बसंतपुर-जैंती मार्ग स्वीकृत हुआ था। स्वीकृति के 16 साल गुजर जाने के बावजूद अब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सड़क न होने के कारण ग्रामीण रोगी और प्रसव पीड़िताओं को डोली में मुख्य मार्ग तक ले जाते हैं। कई बार रोगी की हालत गंभीर होने पर वह रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
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यातायात सुविधा नहीं होने के कारण गांव से लगातार पलायन बढ़ रहा है। लंबे समय से मांग के बावजूद अब तक गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनी तो त्यूनरा, रौसिला, बडियारैत, टिकर, रणक, नया संग्रौली आदि गांवों के लोगों को यातायात सुविधा का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले नेता गांव में वोट मांगने आते हैं और ग्रामीणों से सड़क बनाने समेत तमाम बड़े दावे करते हैं। चुनाव के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते हैं। धरने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश सिंह नेगी, ग्राम प्रधान हंसी देवी, पंकज नेगी, सुंदर सिंह, चंदन सिंह, गौरव, गिरीश, भूपाली, सोनू, अमित, अर्जुन, भूपाल, जगदीश, राकेश, हयात आदि बैठे।
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