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Almora News: होली गायन में विलुप्त हो रही डांगर परंपरा

Fri, 14 Mar 2025 12:16 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Fri, 14 Mar 2025 12:16 AM IST
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dangar Will soon to be History
अल्मोड़ा। पहाड़ों में बदलते समय के साथ होली गायन का स्वरूप भी बदल चुका है। एक दौर था जब होली गायन में ‘’डांगर’’ की अहम भूमिका होती थी। डांगर कोई वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि एक हुनरमंद व्यक्ति होता था, जो ढोलकी की थाप पर होली गीत गाता था और पूरी टोली को संचालित करता था। डांगर के बिना न तो होली गायन होता था और न ही झोड़ा गायन। लेकिन यह अनूठी परंपरा अब विलुप्त होने के कगार पर है।
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कोसी के प्रकाश सिंह, जो पिछले 10 साल से डांगर की भूमिका निभा रहे हैं, बताते हैं कि पुराने समय में ग्रामीण क्षेत्रों में डांगर का विशेष महत्व था।
वह कहते हैं, “डांगर की ढोलकी की थाप के अनुसार ही महिलाएं झोड़ा गाती थीं और होली टोली के सदस्य गीत के सुर मिलाते थे।” प्रकाश बताते हैं कि डांगर को हर घर से गुड़ और लजीज खाद्य सामग्री दी जाती थी, लेकिन अब यह परंपरा लगातार कम होती जा रही है।
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