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कोल्ड टेक्नोलॉजी से चार डिग्री तापमान में भी पक्की हो जाएंगी सड़कें
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:53 PM IST
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मध्य व उच्च हिमालयी क्षेत्र की सड़कों को पक्का करने के लिए गर्मी के सीजन का इंतजार नहीं करना पड़ेेगा। कोल्ड टेक्नोलॉजी से महज चार डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी कच्ची सड़कों को चमचमाती सड़कों में तब्दील किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए डामरीकरण या हॉट मिक्स जैसे तामझाम की जरूरत नहीं होती है। बागेश्वर जिले के ठंडे इलाकों से होकर गुजरने वाली 53 किलोमीटर लंबी एक सड़क में इसी तकनीक से डामरीकरण किया जा रहा है।
मालूम हो कि सड़कों में डामरीकरण या हॉट मिक्स करने के लिए भारी-भरकम तामझाम की जरूरत होती है। सड़कों को हॉट मिक्स करने के लिए प्लांट लगाने पड़ते हैं। धूल और धुआं उगलने वाले इन प्लांटों में ईंधन तो खर्च होता ही है पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंचती है। इन प्लांटों में 170 डिग्री के तापमान में तारकोल और कंक्रीट का मिक्सर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे बड़े डंपरों से संबंधित स्थलों तक भेजा जाता है। इसके बावजूद जाड़ों में हॉट मिक्स सफल नहीं होता है। सड़कों में डामरीकरण या हॉट मिक्स करने के लिए सड़कों का निर्माण करने वाली एजेंसियों को गर्मी के सीजन का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी के तुरंत बाद बरसात का सीजन इसमें बड़ी बाधा पहुंचाता है। इससे कई सड़कों में समय से काम नहीं हो पाता है।
परंतु अब कोल्ड टेक्नोलॉजी से सड़कों को कभी भी पक्का किया जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्र की कुछ सड़कों में इसका प्रयोग सफल रहने के बाद बागेश्वर जनपद की ठंडे क्षेत्र की 53 किलोमीटर लंबी रिखाड़ी-बाछम सड़क को भी इसी विधि से पक्का करने का काम चल रहा है। पीएमजीएसवाई के ईई गिरीश चंद्र खोलिया ने बताया कि इस तकनीक से महज चार डिग्री तापमान में भी सड़क को हॉट मिक्स जैसा बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसमें कोल्ड इमल्सन नामक एक तरल पदार्थ को गिट्टी के साथ मिक्स कर सड़क पर बिछाने के बाद रोलर चलाया जाता है। भूरे रंग का यह द्रव्य जैसे ही काले रंग में चेंज होता है सड़क हॉट मिक्स की तरह चमचमाने लगती है और एक घंटे में सड़क में वाहन चलाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कोल्ड टेक्नोलॉजी से सड़क को पक्का करने के लिए विटकैम कंपनी की ओर से एक एक्सपर्ट इंजीनियर को यहां भेजा गया है।
मालूम हो कि सड़कों में डामरीकरण या हॉट मिक्स करने के लिए भारी-भरकम तामझाम की जरूरत होती है। सड़कों को हॉट मिक्स करने के लिए प्लांट लगाने पड़ते हैं। धूल और धुआं उगलने वाले इन प्लांटों में ईंधन तो खर्च होता ही है पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंचती है। इन प्लांटों में 170 डिग्री के तापमान में तारकोल और कंक्रीट का मिक्सर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे बड़े डंपरों से संबंधित स्थलों तक भेजा जाता है। इसके बावजूद जाड़ों में हॉट मिक्स सफल नहीं होता है। सड़कों में डामरीकरण या हॉट मिक्स करने के लिए सड़कों का निर्माण करने वाली एजेंसियों को गर्मी के सीजन का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी के तुरंत बाद बरसात का सीजन इसमें बड़ी बाधा पहुंचाता है। इससे कई सड़कों में समय से काम नहीं हो पाता है।
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परंतु अब कोल्ड टेक्नोलॉजी से सड़कों को कभी भी पक्का किया जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्र की कुछ सड़कों में इसका प्रयोग सफल रहने के बाद बागेश्वर जनपद की ठंडे क्षेत्र की 53 किलोमीटर लंबी रिखाड़ी-बाछम सड़क को भी इसी विधि से पक्का करने का काम चल रहा है। पीएमजीएसवाई के ईई गिरीश चंद्र खोलिया ने बताया कि इस तकनीक से महज चार डिग्री तापमान में भी सड़क को हॉट मिक्स जैसा बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसमें कोल्ड इमल्सन नामक एक तरल पदार्थ को गिट्टी के साथ मिक्स कर सड़क पर बिछाने के बाद रोलर चलाया जाता है। भूरे रंग का यह द्रव्य जैसे ही काले रंग में चेंज होता है सड़क हॉट मिक्स की तरह चमचमाने लगती है और एक घंटे में सड़क में वाहन चलाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कोल्ड टेक्नोलॉजी से सड़क को पक्का करने के लिए विटकैम कंपनी की ओर से एक एक्सपर्ट इंजीनियर को यहां भेजा गया है।
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