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सफाई पर ध्यान दें तो सचमुच देवभूमि नजर आएगा उत्तराखंड
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 08 Dec 2015 09:55 PM IST
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देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड के लोग भी देव जैसे ही हैं। वर्तमान में प्रदेश की सड़कें बहुत खूबसूरत हो गई हैं। यदि सफाई के प्रति लोग थोड़ा और जागरूक हो जाएं तो सचमुच उत्तराखंड देवभूमि की परिकल्पना को साकार कर लेगा। यह बात पुणे के तीन बाइकर्सों ने कही। तीनों बाइकर्स 10 हजार किमी की यात्रा के तहत यहां पहुंचे और यहां से दिल्ली को रवाना हो गए।
बाइकर्स दल के ग्रुप लीडर हैं आदित्य जोशी। उनके साथ मंदिप सिंह गुसाईं और ऋषि राज सेठी। तीनों 12 नवंबर को पुणे से निकले थे। गोवाहाटी, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, विशाखापट्टनम, सिलिगुड़ी, भूटान, सिक्किम, गैंगटोक, बिहार, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड के गढ़वाल के बाद मुनस्यारी, चौकोड़ी, कौसानी होते हुए यह गत दिवस यहां रानीखेत पहुंचे। तीनों ने अमर उजाला के साथ वार्ता की। कहा कि वह लोग देश के जिन स्थानों पर भी गए, सबसे अच्छी सड़कें उत्तराखंड में देखने को मिली। लोगों के आवभगत से तीनों खुश दिए। कहा कि जहां भी रुके वहां लोगों ने घर जैसा प्यार दिया।
लोगों ने जिस अपनेपन से उनकी आवभगत की, उससे दिल खुश हो गया। दिल करता है कि सब कुछ छोड़कर देवभूमि में बस जाएं। पुणे पहुंचते ही उनकी 10 हजार किमी की यात्रा पूरी हो जाएगी। आदित्य ने बताया कि इससे पहले वह लेह लद्दाख, कन्या कुमारी, नार्थ ईस्ट की यात्रा भी कर चुके हैं। आदित्य जोशी का पैतृक निवास भी रानीखेत में ही है। वह प्रख्यात साहित्यकार और कलाकार स्व. भैरवदत्त जोशी के पौत्र और ब्रिगेडियर राजेंद्र जोशी के पुत्र हैं। वर्तमान में यह लोग पुणे में सेटल हैं। यहां वह अपने चाचा एडवोकेट निकेत जोशी के यहां रुके थे।
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बाइकर्स दल के ग्रुप लीडर हैं आदित्य जोशी। उनके साथ मंदिप सिंह गुसाईं और ऋषि राज सेठी। तीनों 12 नवंबर को पुणे से निकले थे। गोवाहाटी, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, विशाखापट्टनम, सिलिगुड़ी, भूटान, सिक्किम, गैंगटोक, बिहार, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड के गढ़वाल के बाद मुनस्यारी, चौकोड़ी, कौसानी होते हुए यह गत दिवस यहां रानीखेत पहुंचे। तीनों ने अमर उजाला के साथ वार्ता की। कहा कि वह लोग देश के जिन स्थानों पर भी गए, सबसे अच्छी सड़कें उत्तराखंड में देखने को मिली। लोगों के आवभगत से तीनों खुश दिए। कहा कि जहां भी रुके वहां लोगों ने घर जैसा प्यार दिया।
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लोगों ने जिस अपनेपन से उनकी आवभगत की, उससे दिल खुश हो गया। दिल करता है कि सब कुछ छोड़कर देवभूमि में बस जाएं। पुणे पहुंचते ही उनकी 10 हजार किमी की यात्रा पूरी हो जाएगी। आदित्य ने बताया कि इससे पहले वह लेह लद्दाख, कन्या कुमारी, नार्थ ईस्ट की यात्रा भी कर चुके हैं। आदित्य जोशी का पैतृक निवास भी रानीखेत में ही है। वह प्रख्यात साहित्यकार और कलाकार स्व. भैरवदत्त जोशी के पौत्र और ब्रिगेडियर राजेंद्र जोशी के पुत्र हैं। वर्तमान में यह लोग पुणे में सेटल हैं। यहां वह अपने चाचा एडवोकेट निकेत जोशी के यहां रुके थे।
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