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वनाग्नि की 91 घटनाओं में 109 हेक्टेयर जंगल जला
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बागेश्वर के रतमटा के जंगल में लगी आग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले में वनाग्नि का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब तक जंगल जलने की 91 घटनाएं हो चुकी हैं और 109 हेक्टेयर वन जल चुका है। वनाग्नि से 3.59 लाख रुपये का अनुमानित नुकसान हो गया है। आग से वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रदूषण जनित मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है।
होली के बाद से जिले में वनों के जलने का सिलसिला शुरू हुआ था जिसमें रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार रात को डीएम कार्यालय के पास का जंगल आग की चपेट में आ गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर आग को काबू किया। तब तक जंगल का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ चुका था। कपकोट के कफलटॉप, रतमटा और कालीधार के जंगल भी धधक रहे हैं। गरुड़ क्षेत्र के बैजनाथ और वज्यूला रेंज के जंगलों में कई बार आग लग चुकी है। धरमघर रेंज के जंगल लगातार जल रहे हैं। धरमघर के गुरना और हुड़मधार के जंगलों की आग से वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है।
लगातार आग की घटनाओं में बढ़ोतरी से जिला मुख्यालय सहित घाटी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ गया है। धुएं के कारण सूरज की रोशनी भी कमजोर हो गई है। लोगों में आंख और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। बुजुर्गों और दमा के मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल में धुएं से परेशानी वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने बताया कि धुआं दमा के रोगियों को काफी प्रभावित कर रहा है। एलर्जी और आंख संबंधी परेशानियों को लेकर भी मरीज जांच कराने आ रहे हैं।
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80 प्रतिशत आग की घटनाएं मानव जनित
बागेश्वर। वन विभाग वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती बरतने के साथ लोगों को जागरूक भी कर रहा है। इसके बावजूद जंगलों के जलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। डीएफओ हिमांशु बागरी का कहना है कि जिले में आग की 80 प्रतिशत घटनाएं मानव जनित हैं। कुछ मामलों में अराजक तत्वों को आग लगाते पकड़ा गया है। लापरवाही से आग लगने की घटनाएं भी हो रही हैं। शॉर्ट सर्किट और अन्य कारणों से भी जंगलों में आग लग रही है।
अराजक तत्व वनों को आग के हवाले करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जंगल जलाने वाले छह लोगों के खिलाफ विभाग कार्रवाई कर चुका है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारी मुस्तैदी से आग बुझाने में जुटे हैं। ग्रामीणों से भी वनों को बचाने में विभाग का सहयोग करने की अपील की जा रही है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर
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होली के बाद से जिले में वनों के जलने का सिलसिला शुरू हुआ था जिसमें रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार रात को डीएम कार्यालय के पास का जंगल आग की चपेट में आ गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर आग को काबू किया। तब तक जंगल का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ चुका था। कपकोट के कफलटॉप, रतमटा और कालीधार के जंगल भी धधक रहे हैं। गरुड़ क्षेत्र के बैजनाथ और वज्यूला रेंज के जंगलों में कई बार आग लग चुकी है। धरमघर रेंज के जंगल लगातार जल रहे हैं। धरमघर के गुरना और हुड़मधार के जंगलों की आग से वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है।
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लगातार आग की घटनाओं में बढ़ोतरी से जिला मुख्यालय सहित घाटी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ गया है। धुएं के कारण सूरज की रोशनी भी कमजोर हो गई है। लोगों में आंख और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। बुजुर्गों और दमा के मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल में धुएं से परेशानी वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने बताया कि धुआं दमा के रोगियों को काफी प्रभावित कर रहा है। एलर्जी और आंख संबंधी परेशानियों को लेकर भी मरीज जांच कराने आ रहे हैं।
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80 प्रतिशत आग की घटनाएं मानव जनित
बागेश्वर। वन विभाग वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती बरतने के साथ लोगों को जागरूक भी कर रहा है। इसके बावजूद जंगलों के जलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। डीएफओ हिमांशु बागरी का कहना है कि जिले में आग की 80 प्रतिशत घटनाएं मानव जनित हैं। कुछ मामलों में अराजक तत्वों को आग लगाते पकड़ा गया है। लापरवाही से आग लगने की घटनाएं भी हो रही हैं। शॉर्ट सर्किट और अन्य कारणों से भी जंगलों में आग लग रही है।
अराजक तत्व वनों को आग के हवाले करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जंगल जलाने वाले छह लोगों के खिलाफ विभाग कार्रवाई कर चुका है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारी मुस्तैदी से आग बुझाने में जुटे हैं। ग्रामीणों से भी वनों को बचाने में विभाग का सहयोग करने की अपील की जा रही है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर