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अल्मोड़ा: यहां खोखली नींव पर टिकी भविष्य की मीनार...
Sat, 18 Feb 2023 06:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 18 Feb 2023 06:31 PM IST
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अल्मोड़ा। प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू कर स्कूलों के सुधारीकरण के दावे हो रहे हैं। लेकिन नगर के बीचों-बीच स्थित अल्मोड़ा इंटर कॉलेज इन सभी दावों की पोल खोल रहा है। स्कूल भवन जर्जर हो चुका है। यहां लगातार जमीन दरकने से कमरों में दरारें पढ़ गई हैं। ऐसे में यहां 200 छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
स्कूल की बुनियाद में यहां लगातार भू-धंसाव हो रहा है, इससे दरारें साफ देखीं जा सकती हैं। हाल यह है कि भवन की दरार पढ़ चुकी दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। जमीन धंसने से पर्श टूट गया है। बावजूद इसके सालों बाद भी इसके नवनिर्माण के प्रयास नहीं हुए। ऐसे में बच्चों को कमरों में बैठने से भी डर लगने लगा है। लेकिन उनकी परेशानी को देखने वाला कोई नहीं है। दीवारों पर पड़ी दरारें दिन-पर-दिन चौड़ी होती जा रही हैं जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। छात्र बोले वह खतरे के बीच इस भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।
प्रबंधन समिति ने अपने खर्च से किया मरम्मत का कार्य
अल्मोड़ा। सरकारी तौर पर जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कोई राहत नहीं मिली तो स्कूल प्रबंधन समिति ने अपने खर्च से इसकी मरम्मत करवाई। स्थानीय विधायक ने जीर्णोद्धार के लिए पांच लाख दिए। लेकिन यह धनराशि नाकाफी साबित हुई। पर्याप्त धनराशि न मिलने से स्कूल का नवनिर्माण नहीं हो पा रहा है और यहां पढ़ने वाले छात्र व शिक्षक मायूस हैं।
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बोले छात्र
लंबे समय स्कूल की हालत काफी खराब है। दीवारों पर दरारें पड़ी हैं। ऐसे में कमरों में बैठने में डर लग रहा है।
सर्वेश चन्याल
भवन के जीर्णोद्धार के प्रयास किए जाने चाहिए। हम खतरे के बीच यहां पढ़ रहे हैं। लेकिन हमारी परेशानी देखने वाला कोई नहीं है।
महेंद्र कुमार
स्कूल भवन बदहाल हो चुका है। यहां हमेशा खतरा बना रहता है। बारिश में पानी कमरों में घुसता है, जिससे दिक्कत झेलनी पड़ती है।
आपदाकाल में स्कूल भवन को काफी नुकसान हुआ। स्कूल प्रबंधन कमेटी ने धनराशि जमा कर एक कक्ष का सुधारीकरण किया। विधायक निधि से मिली धनराशि से बोर्ड परीक्षा से पहले फर्श पर पड़ी दरारों को भरने का काम किया गया। नवनिर्माण के लिए बजट की दरकार है।
विजय रावत, प्रधानाचार्य, जीआईसी, अल्मोड़ा।
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स्कूल की बुनियाद में यहां लगातार भू-धंसाव हो रहा है, इससे दरारें साफ देखीं जा सकती हैं। हाल यह है कि भवन की दरार पढ़ चुकी दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। जमीन धंसने से पर्श टूट गया है। बावजूद इसके सालों बाद भी इसके नवनिर्माण के प्रयास नहीं हुए। ऐसे में बच्चों को कमरों में बैठने से भी डर लगने लगा है। लेकिन उनकी परेशानी को देखने वाला कोई नहीं है। दीवारों पर पड़ी दरारें दिन-पर-दिन चौड़ी होती जा रही हैं जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। छात्र बोले वह खतरे के बीच इस भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।
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प्रबंधन समिति ने अपने खर्च से किया मरम्मत का कार्य
अल्मोड़ा। सरकारी तौर पर जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कोई राहत नहीं मिली तो स्कूल प्रबंधन समिति ने अपने खर्च से इसकी मरम्मत करवाई। स्थानीय विधायक ने जीर्णोद्धार के लिए पांच लाख दिए। लेकिन यह धनराशि नाकाफी साबित हुई। पर्याप्त धनराशि न मिलने से स्कूल का नवनिर्माण नहीं हो पा रहा है और यहां पढ़ने वाले छात्र व शिक्षक मायूस हैं।
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बोले छात्र
लंबे समय स्कूल की हालत काफी खराब है। दीवारों पर दरारें पड़ी हैं। ऐसे में कमरों में बैठने में डर लग रहा है।
सर्वेश चन्याल
भवन के जीर्णोद्धार के प्रयास किए जाने चाहिए। हम खतरे के बीच यहां पढ़ रहे हैं। लेकिन हमारी परेशानी देखने वाला कोई नहीं है।
महेंद्र कुमार
स्कूल भवन बदहाल हो चुका है। यहां हमेशा खतरा बना रहता है। बारिश में पानी कमरों में घुसता है, जिससे दिक्कत झेलनी पड़ती है।
आपदाकाल में स्कूल भवन को काफी नुकसान हुआ। स्कूल प्रबंधन कमेटी ने धनराशि जमा कर एक कक्ष का सुधारीकरण किया। विधायक निधि से मिली धनराशि से बोर्ड परीक्षा से पहले फर्श पर पड़ी दरारों को भरने का काम किया गया। नवनिर्माण के लिए बजट की दरकार है।
विजय रावत, प्रधानाचार्य, जीआईसी, अल्मोड़ा।