फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Ban on construction within a radius of 300 meters

300 मीटर की परिधि में निर्माण पर भी लगी रोक 

Wed, 27 Apr 2016 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Wed, 27 Apr 2016 10:48 PM IST
विज्ञापन
Ban on construction within a radius of 300 meters
कसारदेवी में स्थित प्राचीन शिलालेख। - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन



 अल्मोड़ा के पास कसारदेवी में एक शिला में 1400 साल पुराना दुर्लभ लेख अंकित है। यह लेख ब्राह्मी लिपि में अंकित है। 1950 के दशक में इसका अनुवाद किया गया, लेकिन संरक्षण के अभाव में यह एतिहासिक विरासत नष्ट होने की कगार पर थी। इस दुर्लभ विरासत की उपेक्षा को लेकर अमर उजाला ने कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए। इसका असर यह रहा कि अब राज्य पुरातत्व विभाग ने इस शिलालेख को संरक्षण में ले लिया है। विभाग ने इस स्थल पर बोर्ड भी लगा दिया है। शिलालेख की 300 मीटर की परिधि में बगैर अनुमति के किसी तरह के निर्माण पर भी रोक लगा दी गई है। 
मालूम हो कि कसारदेवी मंदिर के पास स्थित एक शिला में छठी शताब्दी का लेख मिला है। यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि में है। 1950 के दशक में दिनेश चंद्र सरकार ने सबसे पहले एपिग्राफिया इंडिया में इसका अनुवाद प्रकाशित किया था। कई वर्षों तक यह विरासत लावारिस हालत में रही। जिससे कई बार लोगों ने जाने-अनजाने इसे नुकसान भी पहुंचाया। 
विज्ञापन

पिछले कुछ वर्षों में अमर उजाला ने कई बार इस दुर्लभ शिलालेख के बारे में विभिन्न मुद्दों पर आधारित खबरें प्रकाशित कीं। इसके बाद राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित करने के लिए प्रस्ताव भेजा। अब विभाग ने इसे संरक्षित स्मारकों की श्रेणी में शामिल कर लिया है। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि वहां शिलालेख की जानकारी वाला बोर्ड लगा दिया गया है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को भी इस दुर्लभ शिलालेख के बारे में समुचित जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि शिलालेख की 300 मीटर की परिधि में अनुमति के बिना किसी तरह के निर्माण पर रोक भी लगा दी गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या लिखा है इस शिलालेख में
करीब 1400 वर्ष पहले उकेरा गया यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि में है। इसका संस्कृत अनुवाद है- ‘रुद्रेश्वर: प्रतिष्ठापित: वेतला पुत्रा रुद्रकेण।’  इसका अर्थ है ‘वेतला के पुत्र रुद्र ने यहां महादेव को स्थापित किया।’ इससे इस बात को भी बल मिलता है कि उस समय भी यहां महादेव के मंदिर स्थापित हुए थे। 

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed