रानीखेत (अल्मोड़ा)। जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं ने पर्वतीय कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है। आतंक के चलते कई स्थानों पर सब्जी उत्पादन का कार्य सिमट चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को कृषि मेले अथवा अन्य आयोजनों के बजाए जानवरों के आतंक से निजात दिलानी चाहिए।
सिलोर, ककलासौं, कंडारखुवा, धूराफाट पट्टी से जुड़े गांवों में जंगली सूअरों और बंदरों ने फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। मकड़ों, बिल्लेख सहित तमाम सब्जी उत्पादन के मशहूर इलाकों में आतंक के चलते सब्जी का उत्पादन सिमट चुका है। रानीखेत नगर, मालरोड, कुंपूर लालकुर्ती में भी आतंक से अछूता नहीं है। इन क्षेत्रों में बंदरों के साथ ही लंगूर भी सक्रिय होने से समस्या और बढ़ गई है। कुंपुर लालकुर्ती, चमड़खान आदि क्षेत्रों में लंगूर अधिक सक्रिय है। कास्तकार राजेंद्र बिष्ट ने बताया कि वन विभाग और शासन को जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के प्रयास करने चाहिए। यही हाल रहे तो पारंपरिक कृषि व्यवस्था से लोगों का मोहभंग हो जाएगा।