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अंडोली क्षेत्र की सात हजार आवादी जूझ रही पेयजल संकट से
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अल्मोड़ा। भनोली तहसील के अंडोली क्षेत्र के गांवों में लंबे समय बाद भी पेयजल संकट दूर नहीं हो पाया है। इन गांवों के लिए झांकरसैम-मल्ला गैराड़ पेयजल योजना स्वीकृत है, लेकिन योजना का निर्माण नहीं होने से सात ग्राम पंचायतों की करीब सात हजार से अधिक आबादी को सालभर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
ग्राम पंचायत अंडोली, गुरुड़ाबांज, काना, कोटुली, तल्ला गैराड़, मल्ला गैराड़, मटकन्या गांवों के लिए स्थानीय गधेरों से करीब साढे़ तीन दशक पूर्व पेयजल योजनाएं बनी थीं। वर्तमान में यह पेयजल योजनाएं जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गई हैं। जिनसे नाममात्र की पानी की आपूर्ति होती है। जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने से स्थानीय ग्रामीण दूरदराज स्थित नौलों और गधेरों से पानी लाकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। इस कारण इन गांवों की करीब सात हजार की आबादी को सालभर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। मवेशियों के लिए पानी जुटाने में उन्हें कापी परेशानी होती है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता देवीदत्त पांडे का कहना है कि इन गांवों के लिए पांच साल पहले झांकरसैम-मल्ला गैराड़ पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी। योजना का निर्माण सैगाड़ गधेरे से होना है, लेकिन अब तक योजना नहीं बन सकी है और ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्राम पंचायत अंडोली, गुरुड़ाबांज, काना, कोटुली, तल्ला गैराड़, मल्ला गैराड़, मटकन्या गांवों के लिए स्थानीय गधेरों से करीब साढे़ तीन दशक पूर्व पेयजल योजनाएं बनी थीं। वर्तमान में यह पेयजल योजनाएं जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गई हैं। जिनसे नाममात्र की पानी की आपूर्ति होती है। जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने से स्थानीय ग्रामीण दूरदराज स्थित नौलों और गधेरों से पानी लाकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। इस कारण इन गांवों की करीब सात हजार की आबादी को सालभर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। मवेशियों के लिए पानी जुटाने में उन्हें कापी परेशानी होती है।
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क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता देवीदत्त पांडे का कहना है कि इन गांवों के लिए पांच साल पहले झांकरसैम-मल्ला गैराड़ पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी। योजना का निर्माण सैगाड़ गधेरे से होना है, लेकिन अब तक योजना नहीं बन सकी है और ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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