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पहाड़ की बेटी काजल ने वायु सेना में पायलट बनकर छुआ आसमान
Updated Sun, 16 Dec 2018 10:56 PM IST
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अल्मोड़ा। चंपावत जिले के कनल गांव की रहने वाली काजल पांडे सिकंदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड में अंतिम पग पार करते ही एयर फोर्स में पायलट बन गई हैं। काजल को बचपन से पायलट बनने का शौक था। कठिन परिश्रम के बाद उनका यह सपना सच हो गया। काजल बचपन में अल्मोड़ा में रह चुकी है।
शनिवार को सिकंदराबाद में पासिंग आउट परेड के बाद काजल पांडे एयरफोर्स में पायलट बन गई हैं। मूलरूप से चंपावत जिले के कनल गांव निवासी काजल ने 2017 में एआईटी कालेज पूना से कंप्यूटर साइंस में बी टेक किया। वायु सेना में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका चयन वायु सेना के लिए हुआ। सिकंदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड के बाद वह वायु सेना में पायलट बन गई हैं।
काजल के पिता विद्यासागर पांडे सेना में कर्नल हैं। वर्तमान में वह लद्दाख में सेवारत हैं। माता मीना पांडे गृहणी हैं। बहन पूजा पांडे नेशनल लॉ विश्वविद्यालय लखनऊ से एलएलबी कर रही हैं। काजल बचपन में अल्मोड़ा में अपने मौसा एसएसजे परिसर के प्रो. एनडी कांडपाल और मौसी डॉ. जया कांडपाल के घर में रही हैं। उन्होंने वायु सेना के फाइटर प्लेन चलाने का प्रशिक्षण लिया है। इस बार तीन महिला पायलट बनी हैं। जिसमें से कुमाऊं से काजल पांडे भी शामिल हैं।
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शनिवार को सिकंदराबाद में पासिंग आउट परेड के बाद काजल पांडे एयरफोर्स में पायलट बन गई हैं। मूलरूप से चंपावत जिले के कनल गांव निवासी काजल ने 2017 में एआईटी कालेज पूना से कंप्यूटर साइंस में बी टेक किया। वायु सेना में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका चयन वायु सेना के लिए हुआ। सिकंदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड के बाद वह वायु सेना में पायलट बन गई हैं।
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काजल के पिता विद्यासागर पांडे सेना में कर्नल हैं। वर्तमान में वह लद्दाख में सेवारत हैं। माता मीना पांडे गृहणी हैं। बहन पूजा पांडे नेशनल लॉ विश्वविद्यालय लखनऊ से एलएलबी कर रही हैं। काजल बचपन में अल्मोड़ा में अपने मौसा एसएसजे परिसर के प्रो. एनडी कांडपाल और मौसी डॉ. जया कांडपाल के घर में रही हैं। उन्होंने वायु सेना के फाइटर प्लेन चलाने का प्रशिक्षण लिया है। इस बार तीन महिला पायलट बनी हैं। जिसमें से कुमाऊं से काजल पांडे भी शामिल हैं।
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