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81 साल की उम्र में भी रामलीला का पूरा प्रबंधन संभाले हैं रंगकर्मी शिवचरण
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 12 Oct 2015 11:33 PM IST
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प्रसिद्ध रंगकर्मी और हुक्का क्लब की रामलीला के संचालक शिवचरण पांडे पिछले 50 साल से रामलीला में हिस्सा ले रहे हैं। 81 वर्षीय पांडे ने कई सालों तक दशरथ का अभिनय किया।
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आज भी हुक्का क्लब की रामलीला का पूरा प्रबंधन और निर्देशन उन्हीं के हाथ में है। पांडे कहते हैं कि 50 साल के दौर में रामलीला में काफी बदलाव आए हैं। साथ ही आज की युवा पीढ़ी का रामलीला में खास रुझान नहीं रहता।
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पांडे ने बताया कि उन्होंने शुरू में नंदादेवी की रामलीला में अभिनय किया। उसके बाद 1978 में हुक्का क्लब लक्ष्मी भंडार में रामलीला शुरू करवाई। उन्होंने दशरथ, सुषेन वैद्य सहित कई पात्रों का अभिनय किया।
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पिछले कई सालों से हुक्का क्लब की रामलीला का पूरा प्रबंधन उन्हीं के हाथों में रहता है। 81 साल की उम्र में भी वह पात्रों को प्रशिक्षण देने के साथ ही पूरा निर्देशन करते हैं।
पांडे ने बताया कि 50 साल पहले रामलीला में माइक का प्रयोग नहीं होता था। पात्रों की आवाज ही इतनी बुलंद होती थी कि वह दर्शकों तक पहुंच जाती थी। बाद के वर्षों में सुविधाएं बढ़ने से रामलीला को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करना संभव हुआ है।
वह बताते हैं कि नगर क्षेत्र की रामलीला में बड़ा बदवाल यह आया है कि रामलीला के दृश्यों के बाद मंच पर दिखाई देने वाला जोकर लगभग गायब हो गया है। इसके अलावा रावण के दरबार में बार-बार नृत्य और प्रोम्पटिंग की प्रथा भी लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में यह सभी विधाएं अभी तक चल रही हैं।
श्री पांडे का कहना है कि हाल के वर्षों में मनोरंजन के साधन बढ़ने और अन्य कारणों से युवा पीढ़ी का रामलीला से रुझान कम हुआ है। पहले राम, लक्ष्मण, सीता आदि पात्रों के रूप चयन होने पर बच्चों के अभिभावक खुश होते थे, लेकिन आज कई अभिभावक अपने बच्चों को पाठ खेलने के लिए नहीं भेजते।
इसके पीछे पढ़ाई का बोझ भी एक कारण हो सकता है। हालांकि संतोष की बात यह है कि आज भी अनेक स्थानों पर रामलीला का मंचन हो रहा है और भारी संख्या में लोग रामलीला देखने आते हैं।