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जेल में बंदियों को अधिकार की दी जानकारी
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अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला कारागार में विधिक जागरूकता शिविर लगाया गया। प्राधिकरण के सचिव योगेंद्र कुमार सागर ने बंदियों को उनके अधिकारों से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि बंदियों को विधिक सेवा प्राधिकरण 1987 की धारा 12 (जी) के तहत विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्ली बारगेनिंग एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत आरोपी अपने अपराध को मर्जी से स्वीकार करता है। दोनों पक्षों के बीच होने वाला समझौता अदालत की देखरेख में होता है।
समझौते के बाद मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी अपने गुनाह कबूल करता है। आरोपी की सजा उस केस की न्यूनतम सजा से आधी या उससे भी कम कर दी जाती है। इसमें गलती या आवेश में हुए अपराध के कारण अपराधी सजा से बच जाता है। प्ली बार्गेनिंग प्रक्रिया के तहत दो से तीन तारीख में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद के निपटारा कर दिया जाता है। उन्होंने जेल में बंदियों के बैरेकों, स्वास्थ्य कक्ष, भोजन सामग्री, लीगल एड क्लीनिक आदि का निरीक्षण किया।
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इस संबंध में कारागार अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर कारागार अधीक्षक मेघराज सिंह, अधिवक्ता गजेंद्र मेहता, हिमांशु मेहता, महेश चंद्र सिंह परिहार, प्रमोद कुमार, रितेश कुमार आदि भी मौजूद थे। इस दौरान बंदियों को सरल कानूनी ज्ञानमाला पुस्तकों का वितरण भी किया गया।
उन्होंने कहा कि बंदियों को विधिक सेवा प्राधिकरण 1987 की धारा 12 (जी) के तहत विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्ली बारगेनिंग एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत आरोपी अपने अपराध को मर्जी से स्वीकार करता है। दोनों पक्षों के बीच होने वाला समझौता अदालत की देखरेख में होता है।
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समझौते के बाद मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी अपने गुनाह कबूल करता है। आरोपी की सजा उस केस की न्यूनतम सजा से आधी या उससे भी कम कर दी जाती है। इसमें गलती या आवेश में हुए अपराध के कारण अपराधी सजा से बच जाता है। प्ली बार्गेनिंग प्रक्रिया के तहत दो से तीन तारीख में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद के निपटारा कर दिया जाता है। उन्होंने जेल में बंदियों के बैरेकों, स्वास्थ्य कक्ष, भोजन सामग्री, लीगल एड क्लीनिक आदि का निरीक्षण किया।
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इस संबंध में कारागार अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर कारागार अधीक्षक मेघराज सिंह, अधिवक्ता गजेंद्र मेहता, हिमांशु मेहता, महेश चंद्र सिंह परिहार, प्रमोद कुमार, रितेश कुमार आदि भी मौजूद थे। इस दौरान बंदियों को सरल कानूनी ज्ञानमाला पुस्तकों का वितरण भी किया गया।