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भ्रूण परीक्षण कराया जाना गंभीर अपराध : जिला न्यायाधीश
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:06 PM IST
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अल्मोड़ा। विकास भवन में हुई जागरूकता कार्यशाला में आशा कार्यकर्ताओं को पीसीपीएनडीटी एक्ट की जानकारी दी गई। जिला न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि गर्भावस्था में किसी भी महिला अथवा उसके परिजनों द्वारा भ्रूण परीक्षण कराया जाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। लिंग परीक्षण कराने में यदि कोई आशा कार्यकर्ता, डॉक्टर अथवा संबंधित महिला भी शामिल हो तो उन्हें कड़ा दंड देने का कानून है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन, पीएलवी के सहयोग से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पूर्णत: बाल विवाह में लगाम लगा दी गई है। अब कोर्ट के समक्ष ऐसे मामले नहीं आ रहे हैं। कन्या भ्रूण हत्या में लगाम लगाने के लिए गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे अपराध होने पर तुरंत सूचित करें। देश में प्रति हजार लड़कों में 940 लड़कियां हैं, जो एक गंभीर समस्या है।
लिंग परीक्षण के लिए सहयोग देना और विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। ऐसे में तीन से पांच साल की जेल और दस हजार से एक लाख तक जुर्माना हो सकता है। गर्भवती स्त्री का जबर्दस्ती गर्भपात कराना अपराध है। ऐसा करने पर आजावीन कारावास की सजा भी हो सकती है।
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अपर जिला जज राहुल गर्ग ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या गंभीर अपराध है। ऐसे कृत्य करने पर डॉक्टरों की डिग्री भी छिन सकती है। संचालन करते हुए प्राधिकरण के सचिव शेष चंद्र ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट कन्या भ्रूण हत्या को बचाने में एक सराहनीय एक्ट है। इस एक्ट का बेहतर क्रियान्वयन होने से राजस्थान पूरे भारत में एक मॉडल राज्य बन गया है। इसे कुछ राज्य भी लागू करने जा रहे हैं। कार्यशाला में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गीता साह आदि भी मौजूद थे। इस मौके पर सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण भी किया गया।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन, पीएलवी के सहयोग से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पूर्णत: बाल विवाह में लगाम लगा दी गई है। अब कोर्ट के समक्ष ऐसे मामले नहीं आ रहे हैं। कन्या भ्रूण हत्या में लगाम लगाने के लिए गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे अपराध होने पर तुरंत सूचित करें। देश में प्रति हजार लड़कों में 940 लड़कियां हैं, जो एक गंभीर समस्या है।
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लिंग परीक्षण के लिए सहयोग देना और विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। ऐसे में तीन से पांच साल की जेल और दस हजार से एक लाख तक जुर्माना हो सकता है। गर्भवती स्त्री का जबर्दस्ती गर्भपात कराना अपराध है। ऐसा करने पर आजावीन कारावास की सजा भी हो सकती है।
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अपर जिला जज राहुल गर्ग ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या गंभीर अपराध है। ऐसे कृत्य करने पर डॉक्टरों की डिग्री भी छिन सकती है। संचालन करते हुए प्राधिकरण के सचिव शेष चंद्र ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट कन्या भ्रूण हत्या को बचाने में एक सराहनीय एक्ट है। इस एक्ट का बेहतर क्रियान्वयन होने से राजस्थान पूरे भारत में एक मॉडल राज्य बन गया है। इसे कुछ राज्य भी लागू करने जा रहे हैं। कार्यशाला में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गीता साह आदि भी मौजूद थे। इस मौके पर सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण भी किया गया।