{"_id":"573402284f1c1b3a4391a016","slug":"after-uttarakhand-scenario-no-one-got-nothing","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाटे में 54 दिन तक चले सियासी ड्रामे का हर किरदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाटे में 54 दिन तक चले सियासी ड्रामे का हर किरदार
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 May 2016 09:40 AM IST
विज्ञापन
हरीश रावत
- फोटो : pti
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट में फ्लोर टेस्ट के नतीजे की घोषणा के साथ प्रदेश में चल रहे हाई वोल्टेज सियासी ड्रामे का बुधवार को पटाक्षेप हो गया। 54 दिनों के इस सियासी संकट के ड्रामे का हासिल कुछ भी नहीं हुआ। ड्रामे का हर किरदार घाटे में है। साथ ही उत्तराखंड को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा। सियासी संकट का चक्र जहां से शुरू हुआ था उसी स्थिति में आकर रुक गया यानी मुख्यमंत्री की गद्दी हरीश रावत के पास ही रहेगी।
विज्ञापन
18 मार्च को शुरू हुए इस सियासी संकट के ड्रामे के मुख्य किरदार हरीश रावत, बागी विधायक और भाजपा सभी चुटहिल हैं। इस 54 दिनों के ड्रामे में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पैरों में सीबीआई जांच की जंजीर पड़ गई। यह जांच आने वाले दिनों में उन्हें दिक्कतें पैदा करती रहेगी।
विज्ञापन
खासतौर पर केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर होते ही यह जंजीर कभी भी खिंच सकती है। दूसरे किरदार के रूप में नौ बागी विधायक रहे हैं, उनका मकसद हरीश रावत को मुख्यमंत्री पद से हटाना था।
विज्ञापन
बागी विधायकों का ख्याल नहीं उतरा जमीन पर
फ्लोर टेस्ट के बाद बागी विधायकों के मकसद को करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने परिणाम घोषित कर दिया मुख्यमंत्री हरीश रावत ही रहेंगे। बागी विधायकों की सारी कार्ययोजना पूरी तरह फ्लाप रही। उनका ख्याल था कि विरोध के स्वर बुलंद करते ही हाई कमान नेतृत्व बदलेगा या फिर भाजपा की मदद से वह सत्ता में आ जाएंगे। बागी विधायकों का सोचा कुछ भी नहीं हुआ। ड्रामे की तीसरा किरदार भाजपा थी, उसको सबसे तेज झटका लगा है। इसका खामियाजा उसे आगे भी भुगतना पड़ सकता है।
सियासी रणनीतिकारों का कहना है कि भाजपा ने आगे की राह धुंधली कर ली है। भाजपाई पॉलिटिकल पंडितों की हर रणनीति मात खा गई। इसका असर दूसरे प्रांतों के विधानसभा चुनावों में भी नजर आ सकता है। भाजपा के विरोधी दलों को उसके खिलाफ मुद्दा मिल गया। इतना ही नहीं कई वरिष्ठ नेताओं का ग्राफ दांव पर है।
सियासी ड्रामे का मंच रहा उत्तराखंड भी नुकसान में ही रहा। विकास कार्यों को झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इसे राजनीतिक आपदा की संज्ञा दे रहे हैं। उनका कहना है कि सियासी संकट से उत्तराखंड को बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन नफा किसी का नहीं।