केदारघाटी में व्यवस्था सुधारने को कर्मी रवाना
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केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं बहाल करने, शवों की ढूंढ-खोज और अंतिम संस्कार करने हेतु गुप्तकाशी से टीम रवाना होने लगी हैं। केदारनाथ धाम और गौरीगांव में चॉपर के जरिए टीम भेजी गई है। टीम को टेंट, खाने का सामान, दवाईयां और अन्य जरूरत की सामग्रियां दी गई हैं।
सारी गतिविधियों पर नजर रखने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए गुप्तकाशी को कमांड सेंटर बनाया गया है। यहां गढ़वाल आयुक्त सुवर्द्धन और आईजी लॉ एंड आर्डर राम सिंह मीणा ने कैंप किया हुआ है। जवाहर नवोदय विद्यालय बणसू जाखधार को अस्थायी पुलिस लाइन बनाया गया है।
इसके लिए देहरादून से एक आरआई (प्रतिसार निरीक्षक) को लाइन की व्यवस्था देखने के लिए बुलाया गया है। पुलिस टीम को लैपटॉप, जनरेटर और कैमरे दिए जा रहे हैं।
गौरीकुंड और केदारनाथ को बेस कैंप बनाया गया है। यहां से टीम धाम सहित पैदल मार्ग पर मिले शवों के अंतिम संस्कार, डीएनए सैंपलिंग, फोटोग्राफी और पंचायतनामा की कार्रवाई करेगी।
गौरीकुंड 70 और केदारनाथ में 100 लोगों की टीम भेजी जा रही है। इसमें पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य और लोनिवि के कर्मी शामिल हैं। गौरीकुंड में 30 पुलिस कर्मी भेजे जा रहे हैं। इसमें पर्वतारोही और कमांडो भी हैं।
मंगलवार को चॉपर से गौरीकुंड टीम भेजने के बाद पुलिस के आठ जवान केदारनाथ भेजे गए। आईजी मीणा ने बताया कि दोनों स्थानों पर टाउनशिप की तरह कार्य किया जाएगा। कर्मी यहां स्थायी रूप से रहेंगे। अलबत्ता रिफ्रेशमेंट के लिए उनकी अदला-बदली की जाएगी। एनडीआरएफ की दो टीमों की भी मांग की गई है।
मौसम करेगा मार्ग खोलने में दिक्कत
गौरीकुंड से रामबाड़ा तक मार्ग खोलने के लिए लोनिवि को पांच दिन का वक्त दिया गया है, लेकिन यहां जिस तरह का मौसम है, उससे लगता है कि रामबाड़ा तक टीम को पहुंचने में 15 दिन लग सकते हैं। रास्ता बनने में जितनी देरी होगी, शवों के अंतिम संस्कार का कार्य उतना ही पीछे होता जाएगा।
टीम में शामिल कर्मियों के दायित्व
पुलिस- पंचायतनामा और पोस्टमार्टम
मेडिकल- डीएनए सेंपलिंग
लोनिवि- रास्ता निर्माण
वन विभाग- जंगली जानवरों से सुरक्षा व लकड़ी का प्रबंध