फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   A recent study unfolded destruction's reality

यूसैक के ताजा अध्ययन में सामने आया तबाही का एक और सच

Thu, 11 Jul 2013 08:26 AM IST
आफताब अजमत
आफताब अजमत Updated Thu, 11 Jul 2013 08:26 AM IST
विज्ञापन
A recent study unfolded destruction's reality

पहाड़ में आई जलप्रलय के कई पहलू सामने आ रहे हैं। केदारघाटी में हुई तबाही के सैटेलाइट चित्रों को उजागर करने वाले उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने एक बार फिर तबाही के दूसरे पहलू का अध्ययन शुरू किया है। मंदाकिनी वैली में जगह-जगह एक हजार लैंडस्लाइड सामने आए हैं।

विज्ञापन


पढ़े, उत्तराखंड आपदा की खबरों की विशेष कवरेज
विज्ञापन


यूसैक के निदेशक डा. एमएम किमोठी ने बताया कि सभी घाटियों में भूस्खलन के अध्ययन के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग केंद्र हैदराबाद की मदद ली जा रही है। अभी तक मंदाकिनी वैली की 2.5 मीटर रिजॉल्यूशन(2.5 मीटर तक की) मैपिंग में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


15 जून से अब तक पूरी मंदाकिनी वैली में एक हजार जगहों पर भूस्खलन पाया गया है। इसमें कई लैंडस्लाइड तो ऐसे हैं, जो कि लंबे समय से मृत थे। इस आपदा में वह भी एक्टिव हो गए। वैली से जुड़े गांवों में सड़क से लेकर घरों की तबाही का मंजर भी काफी चौंकाने वाला है। कई जगहों पर तो सड़क नजर ही नहीं आ रही है।

डा. किमोठी के मुताबिक इसी प्रकार दूसरी घाटियों का सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट जल्द ही सामने आ जाएगी।

विदेशी नहीं देसी सैटेलाइट है कामयाब
यूसैक और इसरो के उत्तराखंड से जुड़े सभी सैटेलाइट अध्ययन में एक और खास बात यह है कि विदेशी सैटेलाइट यहां कामयाब नहीं है। नासा के सैटेलाइट से चित्र लेने पर 15 मीटर ऊपर से ही मैपिंग हो सकती है लेकिन भारत के सैटेलाइट कार्टो सेट 1 और लिस 4 से प्रदेश की तबाही की हकीकत आसानी से सामने आ जाती है।


वैज्ञानिकों के मुताबिक भारतीय सैटेलाइट 2.5 मीटर तक की मैपिंग करने में कामयाब है।

चौराबाड़ी से निकलती है मंदाकिनी
मंदाकिनी अलकनंदा की सहायक नदी है। इसका उद्गम स्थान केदारनाथ के निकट है। मंदाकिनी का स्रोत केदारनाथ के निकट चौराबाड़ी ग्लेशियर है। यह वही ग्लेशियर है, जिससे आए मलबे और पानी की वजह से केदारघाटी में तबाही हुई है। सोनप्रयाग में यह नदी वासुकी गंगा नदी द्वारा पोषित होती है।

रुद्रप्रयाग में आकर मंदाकिनी नदी अलकनंदा में मिल जाती है। उसके बाद अलकनंदा बहती हुई देवप्रयाग की ओर बढ़ती है, जहां वह भागीरथी नदी से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है।

खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed