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'उत्तराखंड की सरकार एकदम बेकार है'
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2013 10:48 AM IST
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भूख-प्यास और थकान से बेहाल लेकिन चेहरे पर गुस्से की ज्वालामुखी। हेलीकाप्टर उतरने के बाद पुलिस वालों के पास नाम नोट करवाया और बाहर जाने लगे।
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इसी बीच मीडिया वाले उनके पास पहुंचे तो बिना बोले तीखी नजरों से देखते हुए आगे बढ़ गए। बाहर परिजन टैक्सी लिए इंतजार कर रहे थे। टैक्सी में बैठने से पहले मीडिया वालों से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार बेकार है। यहां आने लायक नहीं है।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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चारधाम यात्रा संभालना इसके वश में नहीं है। यात्रा को सेना के हवाले कर देना चाहिए। इतना कहकर टैक्सी में बैठे और चले गए।
यह थे मेरठ निवासी भीमसेन रस्तोगी। परिवार के साथ बदरीनाथ धाम गए थे। शनिवार को 11 दिन बाद पत्नी माया, बहू नेहा, पोती आयुषी-अन्नू और पोते कृष्णा के साथ दून पहुंचे। बेटा संजय और दो अन्य राहुल एवं निधि अभी वहीं फंसे हैं। बताया कि जिस दिन लौटना था, उसी दिन भारी बारिश से सड़कें तबाह हो गईं। बिजली न पानी और न ही एक जगह से दूसरी जगह संपर्क करने का साधन बचा।
कोई नजर नहीं आया
बचाव और व्यवस्था के लिए अधिकारियों की तलाश की। लेकिन तीन दिन ढूंढने के बाद भी कोई नजर नहीं आया। जबकि देश के तमाम हिस्सों से हजारों श्रद्धालु फंसे थे। प्रदेश सरकार को चारों धामों में उच्च स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ तैनात करना चाहिए था।
आपदा को तो कोई नहीं रोक सकता, लेकिन अधिकारी घटनास्थलों के पास होते तो राहत कार्य समय से पहले शुरू हो जाता। आपात समय में संपर्क की व्यवस्था होती तो हाल भयावह नहीं होता।
मौके पर प्रशासन की जेसीबी तो थी, लेकिन कुछ मीटर सड़क ठीक करने तक के लिए उसके पास डीजल नहीं था। मजबूर लोगों ने अपनी गाड़ियों से 200 लीटर डीजल निकाल उसे दिया तब जाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचे।