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उत्तराखंड में तबाही के बाद फैलने लगी महामारी
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2013 03:11 PM IST
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बारिश से तबाही के बाद पहाड़ों पर अब महामारी के संकेत मिलने लगे हैं। लाशों के सड़ने से जलस्रोतों के संक्रमित होने का खतरा पैदा हो गया है। बड़ी संख्या में लोग वायरल फीवर, इंफ्लुइंजा की गिरफ्त में हैं।
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इसके साथ ही उल्टी-दस्त फैलने लगा है। हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एलर्ट जारी कर दिया है। कार्यवाहक महानिदेशक डा. जेएस जोशी ने बताया कि महामारी से निपटने के सारे इंतजाम हैं।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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बारिश और बाढ़ से तबाह हुई रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी की घाटियों में यात्रियों की लाशों के सड़ने से वातावरण खराब होने का खतरा पैदा हो रहा है। इन क्षेत्रों में मौजूद डाक्टरों की टीमों का कहना है कि तापमान कम होने के बावजूद लाशों में सड़न पैदा हो गई है।
वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, फ्लू आदि बीमारियां बढ़ रही हैं। सबसे अधिक खतरा जलस्रोतों के संक्रमित होने का है। कार्यवाहक महानिदेशक डा. जोशी का कहना है कि सबसे अधिक खतरा जलजनित रोगों के फैलने का है।
भेजी जा रही हैं क्लोरीन की गोलियां
डा. जोशी ने बताया कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में क्लोरीन की गोलियां भेजी जा रही हैं। 50 हजार क्लोरीन की गोलियां कुमाऊं मंडल से मंगाई हैं। ब्लीचिंग पाउडर, चूना, कीटनाशक और फिनायल उन क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। इसके लिए टिहरी में डिपो बना दिया गया है।
उनका कहना है कि आपदा के बाद सांप, बिच्छू, चूहों की दिक्कत बढ़ती है। इससे प्लेग, फ्लू, इंफ्लुइंजा आदि फैलने का खतरा बढ़ जाता है।उत्तरकाशी के उधरी गांव और आसपास डायरिया फैला है।
दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस असवाल ने बताया कि डाक्टरों की टीमें तैयार हैं। रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में गईं डाक्टरों की टीमें परेशान हैं। फिजिशियन डा. मुकेश सुंदरियाल ने डा. असवाल से दूसरी टीम भेजने के लिए कहा है।
सूत्रों ने बताया कि टीम के दो चिकित्सक बीमार हो गए हैं। उनका इलाज चल रहा है। डाक्टरों का कहना है कि शवों के सड़ने से आबो-हवा प्रभावित हो रही है।
केजीएमयू की टीम पहुंची राजधानी
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के 15 सदस्यीय चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम राजधानी पहुंच गई है। कार्यवाहक महानिदेशक डा. जेएस जोशी ने बताया कि इस टीम को तीन भागों में बांट दिया गया है। एक टीम केदारनाथ, दूसरी बद्रीनाथ और तीसरी गुप्तकाशी भेजी जाएगी।
मनोरोग विशेषज्ञ भी जा रहे पहाड़
आपदा के बाद पहाड़ पर जो लोग जिंदा बचे हैं, उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन पर अजब बदहवासी का आलम तारी रहता है। दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस असवाल ने बताया कि लोगों का इलाज कर रही डाक्टरों की टीमों का कहना है कि आपदा ने यात्रियों को बदहवासी में धकेल दिया है।