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उत्तराखंडः साढ़े नौ हजार लोगों को बचाने की चुनौती
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 26 Jun 2013 03:38 PM IST
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आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बारिश की आशंका को देखते हुए सेना ने कहा है कि सभी फंसे हुए लोगों को निकालने में दो-चार दिन का वक्त लग सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को भी चमोली, उत्तरकाशी में तेज बारिश हो सकती है।
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बचाव अभियान में लगे सैन्य अधिकारियों के मुताबिक 8500 तीर्थयात्री और स्थानीय लोग अब भी बदरीनाथ और आसपास के इलाकों में फंसे हैं। इनमें 5500 तीर्थयात्री और करीब 3 हजार स्थानीय लोग हैं। इसके अलावा 1,000 लोग हर्षिल में फंसे बताए जाते हैं।
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उत्तराखंड में तबाही का मंजर
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इस बीच गोचर पहुंचे वायुसेना प्रमुख एन ए के ब्राउन ने मंगलवार शाम हुए हेलीकॉप्टर हादसे में सभी लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर दी है।
हादसा क्यों हुआ, अभी कहना मुश्किल
ब्राउन ने कहा, 'हमें कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर मिल गया है। अगले कुछ दिनों में हमें पता चल जाएगा हादसा क्यों और कैसे हुआ।' उन्होंने कहा कि फिलहाल यह बताना मुश्किल है कि इसकी वजह मौसम था या तकनीकी समस्या।
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ब्राउन ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग मारे गए हैं। इनमें वायु सेना के पांच, आईटीबीपी के छह और एनडीआरएफ के नौ लोग सवार थे।
एनडीआरएफ के जो नौ लोग मारे गए हैं, उनमें से दो उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। इनमें कमांडेंट नित्य नंद गुप्ता कानपुर से हैं, जबकि काँस्टेबल संजीव कुमार बलिया के रहने वाले थे।
उन्होंने कहा कि इन जांबाजों के मारे जाने का काफी दुख है, लेकिन हमारे कदम नहीं रुकेंगे। हेलीकॉप्टर जरूर हादसे का शिकार हुआ है, लेकिन हौसला नहीं टूटा है। उन्होंने कहा, 'हम रुकेंगे नहीं। ऑपरेशन जारी रहेगा। ज्यादातर काम पूरा कर लिया गया है। अब बदरीनाथ और हर्षिल से लोगों को निकालना बाकी है।'
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केदारनाथ पहुंचा अंतिम संस्कार का सामान, मगर देरी
केदारघाटी और केदारनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पड़े सैकड़ों शवों अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। कहा गया था कि मंगलवार को अंतिम संस्कार का काम शुरू होगा। लेकिन खराब मौसम के कारण संस्कार के लिए सभी सामग्री नहीं पहुंच पाने के कारण ऐसा नहीं हो सका।
अब अंतिम संस्कार के लिए सभी सामग्री केदारनाथ पहुंच गई है। बुधवार को सामूहिक अंतिम संस्कार संभव है। लेकिन इसमें कुछ वक्त भी लग सकता है, क्योंकि इससे पहले सभी शवों के डीएनए सैंपल लिए जाते हैं। यह काम एनडीआरएफ की टीम संभाल रही है।
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महामारी रोकने की कोशिश शुरू
जलप्रलय के बाद केदारघाटी में बारिश के कारण शव पानी में बह रहे हैं। इससे पूरे इलाके में महामारी फैलने की आशंका गहरा गई है।
केदारनाथ धाम मार्ग पर सोनप्रयाग से लगे रामपुर और सीतापुर समेत कई अन्य गांवों में अब डायरिया से स्थिति बिगडऩे का अंदेशा है। डॉक्टरों की टीम महामारी रोकने के लिए क्षेत्र में डटी हुई है। स्थानीय लोगों के साथ ही घाटी से जिंदा लौटकर आ रहे यात्रियों को दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं।
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नेताओं के दौरे से चिढ़ी जनता
स्थानीय लोग तो नेताओं के आने पर विरोध जता रहे हैं। आपदा में जान गंवाने या लापता होने वालों के परिजन भी हर रोज किसी न किसी नेता या अधिकारी पर भड़क रहे हैं।