काशी ने किया नारी शक्ति का सम्मान
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मंगलवार को बीएचयू के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की ओर से ‘भाषायी अभिव्यक्ति में लैंगिक असमानता’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रोहतक विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की प्रो. रोहिणी अग्रवाल ने कहा कि स्त्री लेखन वैचारिक लड़ाई है।
संगोष्ठी में अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने सम्मानित किया। इसमें बीएचयू की पूर्व एमएस प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल, एमएमवी की पूर्व प्राचार्य प्रो. सुशीला सिंह, पूर्व एमएलसी डॉ. वीणा पांडेय, संगीतविद डॉ. मंजू सुंदरम, आस्ट्रिया की कृष्णा दास, प्रो. कविता शाह, डॉ. रचना अग्रवाल, डॉ. रंजना गौड़, प्रो. रोहिणी अग्रवाल, पत्रकार मीरा वोहरा, डॉ. नीता सिंह, डॉ. प्रतिमा गौड़ शामिल रहीं। स्वागत केंद्र की समन्वयक प्रो. रीता सिंह ने किया। संचालन प्रो. श्रद्धा सिंह व डॉ. मीनाक्षी झा ने किया। संकाय प्रमुख प्रो. मंजीत चतुर्वेदी ने अध्यक्षता की। विषय प्रवर्तन डॉ. विनीता चंद्रा ने किया।
वहीं, डीएवी पीजी कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित ‘नारी विभेद: विमर्श से निष्कर्ष’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण द्वारा तीन महिलाओं को स्त्री शक्ति सम्मान से नवाजा गया।
बनारस एवं सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को विश्व महिला दिवस पर आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों में परिवार अदालत की प्रधान न्यायाधीश रेनू अग्रवाल ने महिला न्यायिक अधिकारियों को सम्मानित किया। बनारस बार में फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। उधर, सेंट्रल बार में ‘महिलाओं के विधिक अधिकार और उनका प्रवर्तन’ विषयक गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रोफेसर विभा त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि सेंट्रल हिन्दू स्कूल की लता पांडेय रही। कार्यक्रम में अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव, विवेक शंकर तिवारी, दुर्गा प्रसाद, नित्यानंद राय, न्यायिक अधिकारी मोहमद असलम, शैली राय, अल्पना शुक्ला, मधु गुप्ता, अर्चना तिवारी, रीमा बंसल, रिंकू, माधुरी सिंह, कामिनी सेठ, मीरा यादव आदि शामिल थीं।