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मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ बनारस का ‘पब्लिक आर्ट’ अव्वल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 15 Mar 2016 02:39 AM IST
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अपनी टीम के साथ सुरेश के नायर
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मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ते हुए काशी के ‘पब्लिक आर्ट’ ने बाजी मार ली है। बनारस की दीवारों में खूबसूरत रंग भरने का काम कर रहे दृश्य कला संकाय बीएचयू के प्राध्यापक सुरेश के. नायर और उनके आठ छात्रों की टीम को अमेरिका की संस्था सम्मानित करने जा रही है। अमेरिका की संस्था ‘अर्थ डे नेटवर्क’ की ओर से देश भर के तमाम मेट्रो शहरों में हुए पब्लिक आर्ट में से बनारस में इनके द्वारा किए गए काम को सर्वश्रेष्ठ माना गया। इसके लिए बीएचयू दृश्य कला संकाय को सम्मानित किया जाएगा।
दृश्य कला संकाय के पेंटिंग विभाग के सुरेश के. नायर और उनकी टीम पिछले तीन साल से सार्वजनिक स्थानों पर म्यूरल आर्ट के जरिये शहर को खूबसूरत बनाने का काम कर रही है। पिछले दिनों नगवां स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल की बाउंड्री में उन्होेंने ये म्यूरल आर्ट बनाया। इसमें उन्होंने पंचतत्व को दर्शाया है। इस पब्लिक आर्ट के लिए ही उन्हें संस्था द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। सुरेश के. नायर ने बताया कि संस्था ने देश के तमाम मेट्रो शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, बंगलूरू के पब्लिक आर्ट को देखा लेकिन इनमें से बनारस के इस म्यूरल आर्ट को बेस्ट पब्लिक आर्ट के लिए चुना गया।
इसी सप्ताह संस्था की टीम इसके लिए हमारे संकाय को सम्मानित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हमारे पास बनारस में ही करीब 450 से अधिक प्रोजेक्ट हैं। समय की कमी के चलते छुट्टियों में हम इस काम को अंजाम दे रहे हैं। बता दें कि उनकी टीम ने वाघा बार्डर पर भी अपने इस म्यूरल आर्ट से भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दर्द को बयां किया है।
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दृश्य कला संकाय के पेंटिंग विभाग के सुरेश के. नायर और उनकी टीम पिछले तीन साल से सार्वजनिक स्थानों पर म्यूरल आर्ट के जरिये शहर को खूबसूरत बनाने का काम कर रही है। पिछले दिनों नगवां स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल की बाउंड्री में उन्होेंने ये म्यूरल आर्ट बनाया। इसमें उन्होंने पंचतत्व को दर्शाया है। इस पब्लिक आर्ट के लिए ही उन्हें संस्था द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। सुरेश के. नायर ने बताया कि संस्था ने देश के तमाम मेट्रो शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, बंगलूरू के पब्लिक आर्ट को देखा लेकिन इनमें से बनारस के इस म्यूरल आर्ट को बेस्ट पब्लिक आर्ट के लिए चुना गया।
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इसी सप्ताह संस्था की टीम इसके लिए हमारे संकाय को सम्मानित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हमारे पास बनारस में ही करीब 450 से अधिक प्रोजेक्ट हैं। समय की कमी के चलते छुट्टियों में हम इस काम को अंजाम दे रहे हैं। बता दें कि उनकी टीम ने वाघा बार्डर पर भी अपने इस म्यूरल आर्ट से भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दर्द को बयां किया है।
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