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हर-हर महादेव से गूंजा धरती-आसमान
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Tue, 08 Mar 2016 02:23 AM IST
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महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए लगी भक्तों की कतार।
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महाशिवरात्रि पर सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी की सड़कों पर आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्गों पर आधी रात से ही लंबी कतारें लग गईं। हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे के साथ श्रद्धालु नंगे पांव बाबा दरबार की ओर बढ़े। किसी को पांच घंटे तो किसी को आठ घंटे कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कतार के बीच दर्शनार्थियों को घुसाए जाने को लेकर जगह-जगह नोकझोंक भी हुई। पास निरस्त होने और सुरक्षा इंतजाम चुस्त होने की वजह से वीआईपी के नाम पर किसी की नहीं चली। पंडे, पुजारी और पुलिस के जवान भी अपने परिवारीजनों, चहेतों को मंदिर में प्रवेश नहीं करा सके। शाम पांच बजे तक दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया।
बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से उमड़े भक्त रविवार की रात 11 बजे से ही छत्ताद्वार पर कतारबद्ध होने लगे। मंगला आरती के बाद भोर में चार बजे आम भक्तों के लिए मंदिर का पट खोला गया, तब गगनभेदी जयकारे के साथ श्रद्धालु स्वर्ण शिखरों वाले बाबा के मुक्तांगन की ओर बढ़े और जलाभिषेक शुरू हुआ। सुबह छह बजे तक करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन शहर की सड़कों पर लग गई। लक्सा थाने के पास से भक्तों की कतार दशाश्वमेध होते हुए दोबारा गिरजाघर से घुमाकर गोदौलिया-बांसफाटक से छत्ताद्वार तक लगाई गई। उधर, बुलानाला से दूसरी कतार छत्ताद्वार के लिए लगी।
इस दौरान इन सड़कों पर दो पहिया वाहनों के अलावा रिक्शा, साइकल तक का आवागमन रोक दिया गया। गलियों को भी बैरियर लगाकर बंद कर दिया गया था। इस वजह से मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बिल्कुल ठप रही। दोपहर भोग आरती के समय दिन के 11:30 बजे तक एक लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। इस दौरान छत्ताद्वार पर पुलिस क्षेत्राधिकारी स्तर के अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी। शार्टकट दर्शन के लिए छत्ताद्वार पहुंचे दरोगा और इंस्पेक्टर भी वापस कर दिए गए। शाम को पांच बजे कोतवालपुरा से ढुंढिराज प्वाइंट होते हुए वीआईपी दर्शन की छूट दी गई।
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बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से उमड़े भक्त रविवार की रात 11 बजे से ही छत्ताद्वार पर कतारबद्ध होने लगे। मंगला आरती के बाद भोर में चार बजे आम भक्तों के लिए मंदिर का पट खोला गया, तब गगनभेदी जयकारे के साथ श्रद्धालु स्वर्ण शिखरों वाले बाबा के मुक्तांगन की ओर बढ़े और जलाभिषेक शुरू हुआ। सुबह छह बजे तक करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन शहर की सड़कों पर लग गई। लक्सा थाने के पास से भक्तों की कतार दशाश्वमेध होते हुए दोबारा गिरजाघर से घुमाकर गोदौलिया-बांसफाटक से छत्ताद्वार तक लगाई गई। उधर, बुलानाला से दूसरी कतार छत्ताद्वार के लिए लगी।
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इस दौरान इन सड़कों पर दो पहिया वाहनों के अलावा रिक्शा, साइकल तक का आवागमन रोक दिया गया। गलियों को भी बैरियर लगाकर बंद कर दिया गया था। इस वजह से मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बिल्कुल ठप रही। दोपहर भोग आरती के समय दिन के 11:30 बजे तक एक लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। इस दौरान छत्ताद्वार पर पुलिस क्षेत्राधिकारी स्तर के अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी। शार्टकट दर्शन के लिए छत्ताद्वार पहुंचे दरोगा और इंस्पेक्टर भी वापस कर दिए गए। शाम को पांच बजे कोतवालपुरा से ढुंढिराज प्वाइंट होते हुए वीआईपी दर्शन की छूट दी गई।
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